लुधियाना. इस आलीशान घर का मालिक मनरेगा मजदूर है। 9 घंटे काम करने का मेहनताना मिलता है 163 रुपए। परिचय है, ब्लॉक जगराओं के गांव पब्बियां की अकाली सरपंच मोहिंदर कौर के 60 वर्षीय पति हाकम सिंह। सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है कि जॉब कार्ड नंबर पीबी 04..001...045...0001/66 के साथ इन्होंने गांव की उबड़ खाबड़ जमीन को समतल किया व पौधे लगाए।
केंद्र सरकार की स्कीम महात्मा गांधी नेश्नल रूरल एम्प्लॉयमेंट (मनरेगा) के फंड्स में हो रहे गोलमाल की गांव पब्बियां में यह कोई अकेली मिसाल नहीं है। पिछले 14 साल से दृष्टिहीन 70 वर्षीय मेजर सिंह, गांव के डिपो होल्डर बलजिंदर सिंह व सेना से पेंशन पा रहे डोगर सिंह का नाम भी इस सूची में शामिल है। मेजर सिंह को तो पता भी नहीं है कि उसका नाम मनरेगा में शामिल है जबकि डोगर सिंह का कहना है कि न तो कभी मजदूरी की न ही मेहनताना मिला। कहा गया कि भले का काम है तो मैंने साइन कर दिए।