घटिया सड़क निर्माण में बह गई जनता की कमाई
Source: यशपाल शर्मा | Last Updated 04:54(08/02/12)
लुधियाना. नगर निगम ने जनता का 85 करोड़ रुपए दांव पर लगा दिया है। बीते साल में ये दांव शहर की सड़कों के निर्माण पर खेला गया है और इसमें जनता के करोड़ों रुपए डूबने तय दिखाई दे रहे हैं। बीते एक साल में शहर में बनी अधिकतर सड़कें अभी से खस्ताहाल होने लगी हैं। इन सड़कों पर निगम ने वे करोड़ों रुपया खर्च किया है, जोकि उसने शहरवासियों से हाउस टैक्स, पानी सीवरेज के बिल व अन्य टैक्स के जरिए वसूला था।
ऐसे में साफ है कि निगम शहर के लोगों की गाढ़ी कमाई घटिया सड़क निर्माण में बहा रहा है और सड़कों के टूटने के बाद निगम अधिकारियों के चेहरों पर शिकन तक नहीं है। पिछले साल फोकल प्वाइंट, लिंक रोड, संगीत सिनेमा रोड, मल्हार रोड, हैबोवाल जोशी नगर, माल रोड, कोचर मार्केट रोड, आरके रोड, हाथी कांप्लेक्स रोड, माडल टाउन में बनी सड़कें, दुर्गापुरी में बनी सड़कें, जस्सियां रोड सहित कई सड़कें ऐसी हैं, जो तीन माह से लेकर सवा साल के अंतराल में बनी थी। अहम बात यह है कि ये सड़कें कई जगहों से टूट गई हैं।
सीलकोट डाली सड़कों की भी खुली पोल
बीते तीन से साढ़े तीन माह में ठंड के मौसम में बनीं सड़कों की पोल न खुले, इसके लिए ठेकेदारों ने निगम अधिकारियों की मिलीभगत से इन पर सीलकोट डाल घटिया सड़क निर्माण को छुपाने का भले ही प्रयास किया हो, लेकिन इस पीरियड में हुई एक दो दिन की बारिश ने सब कुछ धो दिया है और सीलकोट वाली सड़कें कई जगहों से उखड़ चुकी है। गौर हो इस सीलकोट के लिए ठेकेदारों को कोई राशि अतिरिक्त अदा नहीं की जाती, इसके बावजूद ठेकेदार घटिया सड़क निर्माण छुपाने को इसका इस्तेमाल करते हैं।
तीन साल की मियाद वाली सड़कें नहीं चली छह माह
नगर निगम की ओर से बनाई जाने वाली सड़कों व गलियों की तीन साल की मियाद तय की हुई है। नियमों के तहत इससे पहले टूटने वाली सड़क व गली का दोबारा एस्टीमेट नहीं बनाया जा सकता। टेंडरों में भी सांठगांठ के चलते ही ठेकेदार की कोई गारंटी तक नहीं की जा रही है। विधानसभा चुनाव व राजनीतिक दबाव के बीच इस बार सर्दियों में भी सड़कों पर प्रीमिक्स डाल निर्माण कार्य जारी रहा।
सड़कें टूटीं, पर जांच नहीं
नगर निगम में ये पहली बार हुआ है कि शहर में इतने बड़े स्तर पर सड़कें व गलियां टूटी हो और इनकी जांच न लगाई जाए। असल में निगम कमिश्नर एमएस जग्गी ही बीते दो साल से बीएंडआर का जिम्मा संभाले हुए हैं और इसके चलते ही अभी तक इस मामले में निगम ने नर्म रवैया अपनाया हुआ है।