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संसद में उठा एएसआई मामला, राष्ट्रपति शासन की मांग

भास्कर न्यूज | Dec 11, 2012, 03:01AM IST
संसद में उठा एएसआई मामला, राष्ट्रपति शासन की मांग
नई दिल्ली। संसद में सोमवार को अमृतसर के एएसआई रविंदरपाल सिंह की हत्या का मामला उठाया गया। कांग्रेसी सांसदों ने इसे बिगड़ती कानून व्यवस्था का उदाहरण बताते हुए पंजाब में राष्ट्रपति शासन की मांग की।
 
कांग्रेस सांसद रवनीत सिंह बिट्टू ने लोकसभा में कहा कि प्रदेश में दुष्कर्म और गोलीबारी की घटनाएं काफी बढ़ गई हैं। लड़कियों का घर से बाहर निकलना सुरक्षित नहीं है। उन्होंने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की। रवनीत ने बेटी से छेड़खानी रोकने पर एएसआई रविंदरपाल सिंह की अकाली दल नेता द्वारा की गई हत्या की ओर ध्यान दिलाया।  
 
उन्होंने कहा कि पंजाब में कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। इसे दुरुस्त करने के लिए केंद्र सरकार का हस्तक्षेप जरूरी है। अकाली दल नेताओं ने उनके बयान का विरोध किया। अकाली दल सांसदों के विरोध के बावजूद रवनीत अपने बयान पर अड़े रहे। उन्होंने कहा कि राज्य में कानून व्यवस्था इतनी खराब हो गई है कि कई पुलिसकर्मी भी खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं।
 
थानों पर अकाली दल का राज
 
रवनीत ने आरोप लगाया कि पंजाब में सत्तारूढ़ अकाली दल ने पुलिस का राजनीतिकरण कर दिया है। पुलिस अकाली नेताओं के दबाव में काम कर रही है। थानों पर अकाली दल का राज है। ऐसी स्थिति में राष्ट्रपति शासन ही विकल्प है।
 
छेहर्टा थाने के कई कर्मी बर्खास्त
 
एएसआई हत्याकांड के दौरान छेहर्टा थाने में तैनात पुलिसकर्मी बर्खास्त कर दिए गए हैं। सोमवार को एएसआई रविंदरपाल के परिवार से मिलने आए उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल ने कोताही बरतने वाले पुलिसकर्मियों की बर्खास्तगी के निर्देश दिए।
 
डीसीपी को दिए निर्देश में आरोपी पुलिसकर्मियों की सूची मंगलवार सुबह 9 बजे तक तलब की गई है। उपमुख्यमंत्री ने एएसआई के साथ गए पुलिस जवान को भी डिसमिस करने के आदेश दिए हैं।  
 
एएसआईपर हमला होने पर उक्त पुलिसकर्मी भाग निकला था। पीड़ित परिवार को सांत्वना देने के बाद सुखबीर ने कहा कि अब इनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार की है। परिवार की सुरक्षा में दो पुलिसकर्मी 24 घंटे तैनात रहेंगे। कुछेक दिन में डिप्टी सीएम कंप्लेंट सैल गठित होगा जिसमें आईजी स्तर के अधिकारी मामलों की प्राथमिकता से जांच करेंगे।
 
ओहदेदारों का रिकॉर्ड खंगाला जाएगा
 
राणा से न कभी मिला और न उसके बारे में कुछ सुना था। दुखद है कि वह शिअद से जुड़ा था। वह किसकी सिफारिश से महासचिव बना, इसकी जांच की जा रही है। पार्टी में सभी ओहदेदारों का रिकॉर्ड खंगाला जाएगा। 
-सुखबीर सिंह बादल, 
उपमुख्यमंत्री, पंजाब
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