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अब कैंपस प्लेसमेंट से चुने जाएंगे स्पेशलिस्ट डॉक्टर

सुखबीर सिंह बाजवा/ | Aug 21, 2012, 04:06AM IST
 
 

चंडीगढ़/अमृतसर। इंजीनियरिंग कॉलेजों से पासआउट होने से पहले इंजीनियरों की प्लेसमेंट हो जाती है। इसी तर्ज पर सेहत विभाग ने भी स्पेशलिस्ट डॉक्टर तलाशने की योजना बनाई है। यह फैसला स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की कमी को देखते लिया गया है। इसके तहत राज्य के मेडिकल कॉलेजों में पीजी डिग्री करने वाले छात्रों को पासआउट होने से पहले ही सरकारी सेवाओं के साथ जोड़ दिया जाएगा। इस नई कवायद से राज्य के सरकारी अस्पतालों में जहां स्पेशलिस्ट डाक्टरों की कमी पूरी होगी, वहीं युवाओं को नौकरी के लिए यहां-वहां नहीं भटकना पड़ेगा।


सेहत मंत्री मदन मोहन मित्तल के निर्देश के बाद सेहत विभाग ने योजना का ब्लू प्रिंट तैयार कर लिया है। लेकिन, अभी इसे लागू करने से पहले कैबिनेट की मंजूरी मिलनी जरूरी है। स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की नियुक्तियों के लिए कमेटी गठित कर ली गई है।


वो सब जो आप जानना चाहते हैं

सरकार को स्पेशलिस्ट डॉक्टर नहीं मिल रहे हैं। जो थोड़े बहुत इंट्रव्यू देने पहुंच भी जाते हैं, वे बाद में ज्वाइन नहीं करते। सेहत मंत्री मदन मोहन मित्तल कुछ दिन पहले स्वीकार कर चुके हैं कि अच्छे डॉक्टर सरकारी सेवा में आना ही नहीं चाहते। इसलिए कैंपस से ही डॉक्टरों को चुनने की योजना बनाई गई है।

स्पेशलिस्ट डॉक्टरों के 515 पद खाली
राज्य में स्पेशलिस्ट डॉक्टरों के ९क्क् पद हैं। इनमें से ५१५ पद खाली हैं। मेडिकल अफसरों के ६क्क् पद खाली हैं। इन पदों को भरने की प्रक्रिया जारी है, लेकिन जिस तेजी से पद भरे जा रहे हैं, उसी तेजी से डॉक्टर नौकरी भी छोड़ रहे हैं।

लंबी छुट्टी लेकर विदेश गए सैकड़ों डॉक्टर
सरकारी डॉक्टर लंबी छुट्टी लेकर विदेश चले जाते हैं। ५क्क् से ज्यादा डॉक्टर ऐसे हैं, जो छह महीने से भी ज्यादा समय से विदेशों में प्रैक्टिस कर रहे हैं। जब नौकरी पर बन आती है तो वे वापस आ जाते हैं। कुछ महीनों बाद फिर विदेश चले जाते हैं।

क्या किया सरकार ने, क्या कर सकती है?

सरकार विदेशों में बसे डॉक्टरों और निजी प्रैक्टिस कर रहे डॉक्टरों को सिर्फ चेतावनी जारी करती है। कई बार ऐसा किया गया है। पिछले महीने सरकार ने डॉक्टरों को १५ अगस्त तक ड्यूटी पर लौटने को कहा था। ५७ डॉक्टर आए भी। सरकार चाहे तो अन्यों को बर्खास्त कर सकती है। लेकिन, ऐसा करना आसान नहीं है।

सैलरी बढ़ाने की मांग
राज्य में स्पेशलिस्ट डॉक्टरों का वेतन ६क्,क्क्क् रुपए प्रतिमाह है, जबकि प्राइवेट अस्पतालों में औसतन एक लाख रुपए तक वेतन मिल रहा है। केंद्र भी वेतन बढ़ाने की सिफारिश कर चुका है, लेकिन पंजाब सरकार ने अब तक इस पर फैसला नहीं लिया है।

ग्रामीण इलाकों का क्या?
राज्य के ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहद खस्ता हैं। स्वास्थ्य मंत्री कई बार यह स्वीकार कर चुके हैं। अब यदि नई भर्ती होती भी है तो पहले शहरी इलाकों को तवज्जो दी जाएगी। ग्रामीण इलाकों का नंबर बाद में आएगा।

एक्सपर्ट व्यू

पहले ढांचागत सुविधाएं दी जानी चाहिए
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. राजिंदर सिंह का कहना है कि स्पेशलिस्ट डॉक्टर दूर-दराज के इलाकों में सेवाएं देने के लिए तैयार हैं, लेकिन वहां ढांचागत सुविधाओं के अभाव के चलते वे पांव पीछे खींच लेते हैं। कैंपस प्लेसमेंट की योजना तो ठीक है, मगर सरकार को इससे पहले अपनी सीएचसी (कम्यूनिटी हेल्थ सेंटर) तक पहुंचने वाली सड़कें बनवानी चाहिए और स्पेशलिस्ट डॉक्टरों के लिए वहां आवासीय सुविधा मुहैया करानी चाहिए। इससे डाक्टरों को सरकारी नौकरी की ओर आकर्षित किया जा सकता है।

अब आगे क्या

मंजूरी मिलते ही भर्ती
सेहत विभाग के डायरेक्टर डॉ. जेपी सिंह ने कहा कि कैंपस प्लेसमेंट के अलावा वॉक इन इंटरव्यू में भी डाक्टरों को रिक्रूट करने की योजना है। कैबिनेट की मंजूरी मिलते ही इस पर काम शुरु कर दिया जाएगा। इससे मेडिकल अफसरों और स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की सीधी भर्ती की जाएगी।
 
 
 

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