पाक में चाइना को मात देगा भारतीय प्लास्टिक
Source: शिवराज द्रुपद | Last Updated 07:45(08/02/12)
अमृतसर. अटारी-वाघा सड़क मार्ग से जारी इंडो-पाक ट्रेड से प्लास्टिक के दानों का निर्यात भविष्य में क्रांतिकारी कदम साबित होने वाला है। हालांकि, अभी तक इसकी सप्लाई पाकिस्तान को समुद्री तथा रेल मार्ग से होती थी, मगर सोमवार को सड़क मार्ग से प्लास्टिक दानों का एक ट्रक सैंपल भेजकर भारत ने पाक ही नहीं अफगानिस्तान, ईरान, इराक समेत अन्य मुल्कों में भी ट्रेड का मार्ग प्रशस्त किया है।
चाइना की मार्किट पर होगा कब्जा: प्लास्टिक कारोबारियों की मानें तो अभी तक पाकिस्तान में ज्यादातर प्लास्टिक चाइना से सप्लाई होकर आता है। अगर कुछ भारत की तरफ से सप्लाई होता था तो वह समुद्री मार्ग से। हालांकि, कुछ साल पहले इंडियन आयल ने अटारी रेल मार्ग के जरिए प्लास्टिक के दाने भेजना शुरू किया है और प्रतिमाह 3,000 टन दाना इससे सप्लाई होता रहा है। बताया जाता है कि पानीपत की रिफाइनरी इसकी आपूर्ति करती रही है। कारोबारियों के अनुसार पंजाब के बठिंडा जिले में बन रही रिफाइनरी वजूद में आते ही सप्लाई औसतन 10,000 टन प्रति माह हो जाएगी।
पाक में मार्केट का बेहतर स्कोप : अंतरराष्ट्रीय आंकड़ों पर गौर करें तो विकसित देशों जैसे कि अमेरिकन तथा यूरोपीय देशों में प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष 30 से 35 किलो प्लास्टिक इस्तेमाल करता है। जबकि भारत जैसे विकासशील देशों का यह खपत औसतन चार से पांच किलो प्रति वर्ष है। जाहिर है कि पाक में भी यही आंकड़ा प्रभावी होता है। पिछले दिनों पाकिस्तान के प्लास्टिक कारोबारियों ने भारत में आकर यहां के कारोबारियों से इस मसले पर बातचीत भी की थी।
13 फरवरी को इंटीग्रेटेड चैकपोस्ट के खुल जाने के बाद अन्य आयटमों के साथ प्लास्टिक के कारोबार को भी बढ़ावा मिल सकेगा। गौर हो कि भारत ने पाकिस्तान के साथ पोली प्रोपेलीन पोली प्यूरी टैरीफटैलिक एसिड तथा हाई डेंसिटी पोलि एथिलीन का अनुबंध किया है। पॉली पैक इंडस्ट्री, लाहौर के एमडी कमर आफताब कहते हैं कि दूसरे मुल्कों की तुलना में भारत का माल उनके लिए सस्ता और सुलभ है।
लाहौर में परचम बुलंद करेगा अमृतसर
वैसे तो अभी तक पाक को प्लास्टिक दाने सप्लाई किए जा रहे हैं मगर आगामी दिनों में यहां से तैयार आयटम भी भेजा जा सकता है। कमोबेश अगर हम अमृतसर के इस उद्योग से जुड़े लोगों की मानें तो वह इसे और तरक्की पर ले जाने को तैयार हैं।
प्लास्टिक प्रोसेसिंग इंडस्ट्रियल एसो. के अध्यक्ष तथा खोसला रबर प्रोडक्ट्स के मालिक संजीव खोसला, एसो. के महासचिव मनजीत सिंह भाटिया, लक्ष्मी प्लास्टिक इंडस्ट्री के मालिक संजीव शर्मा तथा महाबीर प्लास्टिक इंडस्ट्री के मालिक ज्योति खुराना कहते हैं कि दाने की बजाय अगर तैयार आयटम भेजने के लिए सरकारें आगे आएं तो बेहतर होगा। पंजाब में इस वक्त तकरीबन 500 प्लास्टिक के कारखाने हैं, अकेले अमृतसर में 100 के करीब यूनिट चल रहे हैं।
चूंकि अमृतसर लाहौर से सबसे निकट का शहर है। उनका दावा है कि वह लोग अगर अपना माल पाक को देते हैं तो वह उसे सस्ता और टिकाऊ भी साबित होगा। उनका कहना है कि अमृतसर से लाहौर तक का प्रति किलो का किराया मात्र एक से डेढ़ रुपए ही बनता है जबकि समुद्री मांगों से यह दस रुपए प्रति किलो तक पड़ जाता है।