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हरिद्वार से अस्थियां प्रवाहित करने का रिकार्ड लेकर आओ

 
Source: विपन जंड   |   Last Updated 02:10(12/07/11)
 
 
 
 

लुधियाना . 33 साल जीवन संगिनी के बिछुड़ने का गम तो राधे श्याम ने जैसे तैसे सह लिया पर आज उसकी मृत्यु का सर्टिफिकेट लेने के लिए उसे जिस तरह सरकारी दफ्तरों में जून जुलाई की तपती गर्मी में चक्कर लगवाए जा रहे हैं, उससे वह हताश हो चुका है। 95 साल का यह बुजुर्ग उन पांच हजारों लोगों में शामिल हैं, जिनके जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र या लेट रजिस्ट्रेशन के आवेदन सिविल सर्जन दफ्तर में पेंडिंग पड़े हुए हैं।

नगर निगम द्वारा रिकार्ड संभालने में बरती कोताही के कारण बुढ़ापे में उसे पत्नी प्रकाश वती की मौत के सबूत जुटाने पड़ रहे हैं। उसे सीएमसी जाकर रिकार्ड लाने को कहा गया। श्मशानघाट में 33 साल पुराना रिकार्ड भी खंगाला। यहां तक कि उससे कहा गया कि हरिद्वार में जहां पत्नी की अस्थियां प्रवाहित की थी, उनसे लिखवाकर लाए कि वह अस्थियां प्रवाहित करने आया भी था या नहीं। जैसे तैसे कर दस्तावेजी प्रक्रिया मुकम्मल कर ली, पर अब सिविल सर्जन दफ्तर के अफसर फाइल पर मोहर व हस्ताक्षर करने का समय नहीं निकाल पा रहे।

सिम्रिटी रोड निवासी आरएसएस कार्यकर्ता राधे श्याम के मुताबिक दो महीने पूर्व लोकल अड्डे स्थित नगर निगम दफ्तर से पत्नी का डेथ सर्टिफिकेट मांगा तो बताया गया कि जिस पेज पर उनकी पत्नी की मौत दर्ज थी, वह फट गया, इसलिए एसडीएम व सिविल सर्जन से मंजूरी लेकर नए सिरे से रजिस्ट्रेशन करानी होगी। सीएमसी अस्पताल, सिविल लाइंस श्मशानघाट और पता नहीं कहां कहां से पुराना रिकार्ड जुटाने के बाद फाइल तैयार कर ली।

एसडीएम ईस्ट के दफ्तर ने उसकी बुजुर्गावस्था का ख्याल रखकर एक दिन में ही फाइल आगे बढ़ा दी। अब सीएस आफिस 29 जून के बाद से फाइल दबाकर बैठा है। वे जिला सेहत अधिकारी के सामने पेश होकर अपने बुढ़ापे का हवाला दे जल्द काम के लिए भी कह चुके हैं। सोमवार को भी उन्हें वापस लौटना पड़ा।

1992 से पहले जन्म लेने वालों के लिए दिक्कत

यह सिर्फ एक मामला है। लुधियाना के ग्रामीण इलाकों में साल 1992 से पहले जन्म लेने वाले या मर चुके लोगों के सैकडों परिजनों को रोजाना इस प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है। साल1993 में आगजनी की घटना में सीएस आफिस में उनका जन्म मृत्यु का रिकार्ड जल चुका है। जब वे सर्टिफिकेट मांगते हैं, तो उन्हें नॉट फाउंड सर्टिफिकेट मिलता है, जिसका कोई महत्व नहीं है। दोबारा रजिस्ट्रेशन कराने में उन्हें राधे श्याम की तरह ही धक्के खाने पड़ते हैं। हाल ही में चंडीगढ़ में बैठक में फैसला हुआ कि अधजले रिकार्ड से कुछ एंट्री जुटाकर नया रिकार्ड बनाया जाए। बाकी एंट्री के लिए गांवों में कैंप लगाकर मौके पर ही सभी संबंधित विभागों के अफसर औपचारिकताएं पूरी करें लेकिन उस पर अमल नहीं हुआ।

सीधी बात. डा.कुलविंदर सिंह, डीएचओ

सवाल: बुजुर्ग को बार बार चक्कर क्यों लगवाए जा रहे हैं?

जवाब: जिन लोगों की मजबूरी होती है, उनका आउट आफ टर्न काम भी करा दिया जाता है। ये बुजुर्ग भी मुझसे मिल लें, उनका काम हो जाएगा।

सवाल: पर वह आपसे मिल चुके हैं?

जवाब: मुझे इस बारे याद नहीं है। कई बार काम का बोझ ज्यादा होता है। एक बार वे दोबारा मिल लें।

सवाल: इनका काम तो करवा देंगे, लेकिन सर्टिफिकेटों के बाकी लोगों के आवेदनों का क्या होगा जो पेंडिंग पड़े हैं?

जवाब: मैं धीरे धीरे सारे आवेदन निपटा रहा हूं। पंद्रह से बीस दिन में सभी आवेदकों को सर्टिफिकेट जारी कर दिए जाएंगे।

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
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