अटारी बार्डर/अमृतसर. पाकिस्तान में 13 वर्ष से लावारिस जिंदगी जी रही भारत की गीता के परिजनों की तलाश करने पाकिस्तान के मानवाधिकार कार्यकर्ता अंसार बर्नी परिवार सहित शनिवार को भारत पहुंचे।
बर्नी ने एक ओर जहां मीडिया, समाजसेवी और मानवाधिकार संगठनों से गीता उर्फ गुड्डी को उसके परिवार से मिलाने के लिए मदद करने को कहा, वहीं सरहद पार जिंदगी-मौत से जूझ रही तालिबानी क्रूरता का शिकार हुई मलाला यूसुफजाई के लिए अरदास, दुआ और प्रार्थना करने की अपील की। बर्नी के साथ उनकी पत्नी शाहीन बर्नी, भतीजी नशमिया बर्नी, भाई खुर्रम बर्नी और शम्स बर्नी आए हुए हैं।
अखिल भारतीय मानवाधिकार संगठन के महासचिव हवा सिंह तंवर के बुलावे पर 7 दिन के लिए भारत आए बर्नी परिवार ने गीता का मसला भारत के समक्ष रखा है। परिवार के मुताबिक गीता 13 साल पहले लाहौर रेलवे स्टेशन पर मिली थी। वह बोलने और सुनने में असमर्थ है। पहले वह एनजीओ के पास थी, लेकिन पिछले एक माह से वह बर्नी परिवार के संपर्क में आई है और अभी वह उनके परिवार के पास ही है। बर्नी के अनुसार उसकी उम्र 21 वर्ष के करीब है।
उम्मीद जताई जा रही है कि वह गुजरात अथवा राजस्थान के सरहदी इलाके की रहने वाली हो सकती है। संभवतया बोलने और सुनने में असमर्थ होने के कारण उसके परिजनों ने पाकिस्तान जाने वाली गाड़ी में बिठा दिया हो और वह सरहद पार चली आई हो।
बर्नी का कहना है कि वह उनके घर में परिवार की तरह रहती है। उसके लिए घर में मंदिर भी बनाया गया है, मगर वह अपने परिजनों से मिलना चाहती है। उसका दर्द उन लोगों से सहन नहीं होता। बच्ची एक बार अपनों से मिल ले, अगर वह उसे अपनाना नहीं चाहते होंगे तो कोई बात नहीं, उसके शादी-विवाह से लेकर जिंदगी भर का खर्च वह उठाएंगे।
मलाला की हालत गंभीर
बर्नी का कहना है कि मलाला यूसुफजाई जिंदगी-मौत के बीच जूझ रही है। अगले 48 घंटे उसके लिए अहम हैं और ऐसे वक्त में उसके लिए लोगों की दुआ, अरदास और प्रार्थना की जरूरत है। उनका कहना है कि माना कि हम दो मुल्कों में बंट गए हैं, मगर हमारी सोच और समझ नहीं बंटी है। हमला मलाला पर नहीं हुआ है बल्कि हिंदुस्तान और पाकिस्तान की बेटी पर हुआ है, इसलिए वह प्रत्येक हिंदुस्तानी भाई से गुजारिश करते हैं कि ऐसे कट्टरपंथियों के खिलाफ लामबंद हों। गॉड, खुदा, भगवान और वाहेगुरु से अपनी उस बच्ची की सलामती की दुआ करें।