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खामोश हो गया पत्थरों को जुबान देने वाला

 
Source: dainik bhaskar news   |   Last Updated 07:52(09/02/12)
 
 
 
 
अमृतसर. विजुअल आर्ट के बाबा बोहड़ मूर्तिकार अवतार सिंह के निधन से पूरे कला जगत में शोक की लहर है। उनका जाना, जहां कला के क्षेत्र के लिए अपूर्णीय क्षति माना जा रहा है, वहीं एक युग का अंत भी। आधी सदी तक अपनी छैनी व हथौड़े से बेजान पत्थरों को जुबां देने वाले बाऊ जी भले ही हमारे बीच नहीं रहे, लेकिन अपनी रचनाओं के जरिए वह हमेशा हमारे अहसास में जिंदा रहेंगे।



जमीनी कलाकार

10 अप्रैल 1934 को पाकिस्तानी पंजाब में पैदा हुए अवतार सिंह का परिवार बंटवारे के बाद अमृतसर आ गया और मजीठा रोड स्थित बल कलां गांव में बस गया। उनके बड़े भाई इमरोज जाने-माने चित्रकार हैं और उनकी भाभी अमृता प्रीतम (दिवंगत) लेखिका। बताया जाता है कि बड़े भाई को देख-देख कर उन्होंने अपने भीतर कला को निखारा। इसके बाद 1956 में उन्होंने दिल्ली से मूर्तिकला में डिप्लोमा किया। यहीं से शुरू हुआ कला का सफर।


उनके साथ करीब तीन दशक तक काम कर चुके बृजेश जौली बताते हैं कि बाऊ जी ने कभी भी फिगर में विश्वास नहीं किया यही वजह रही है कि हमेशा ही यूनिवर्स में काम करते थे। बेडोल और बेजान पत्थर को वह पलक झपकते जीवंत कर देते थे। तीन बेटों के पिता बाऊ जी हमेशा आम आदमी में रहे। ज्यादा दिन तक साइकल पर चलने के बाद वह मोटरसाईकल पर चला करते थे यद्यपि घर में कई गाड़ियां हैं, मगर वह जमीन पर चलते रहे। शायद यही उनकी सफलता का राज रहा।


आधी सदी का सफर

1956 में जब वह मूर्तिकला के क्षेत्र में उतरे तो कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा। जौली बताते हैं कि उन्होंने शिव पर ज्यादा काम किया। शिव-गंगा, शिवलिंग, शिव-चंद्रमा आदि रचनाएं आज भी बेमिसाल हैं। उन्होंने अपनी प्रदर्शनी लगाने की बजाय वर्कशाप में ज्यादा हिस्सा लिया। काम किया लोगों को सिखाया और मूर्ति वहीं छोड़कर आगे बढ़ गए। 56 साल के अपने इस सफर में उन्होंने 500 से अधिक मूर्तियां तैयार कीं। इनमें से देश के विभिन्न हिस्सों में कई सुशोभित हैं।



प्रदान की। इसी तरह से आई फैक्स ने उन्हें कला विभूषण उपाधि से नवाजा। अंतर राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाली तिशाला (त्रिनले) में दो बार भारत का प्रतिनिधित्व भी उन्होंने किया। वह लंबे समय तक एसजी ठाकर सिंह आर्ट गैलरी के प्रधान भी रहे। खैर, उन्होंने कभी भी कला को कामर्शियल नजरिए से नहीं देखा और ना ही उस तर्ज पर काम किया।


उधर, प्रसिद्ध मूर्तिकार अवतार सिंह के निधन पर पंचरंग आर्टिस्ट ग्रुप ने शोक व्यक्त किया है। ग्रुप के प्रधान कुलवंत सिंह गिल, सचिव माला चावला, भूपिंदर सिंह नंदा, अतुल मेहरा, धर्मेंद्र शर्मा, गुलशन सदाना, डा. बलदेव गंभीर, डा. नीता महेंद्रा, प्रो. ललित, प्रो. शैलेंद्र आदि ने कहा कि अवतार सिंह के निधन से कला जगत को गहरा धक्का लगा है।
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
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