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श्री गुरु नानक देव की सचित्र जन्म साखी तैयार

शिवराज द्रुपद | Jan 10, 2013, 06:16AM IST
श्री गुरु नानक देव की सचित्र जन्म साखी तैयार
 अमृतसर. श्री गुरु नानक देव जी की समग्र जन्म साखी (जीवन वृत्त) अब सचित्र बुक में तैयार है। देश में पहली बार तैयार यह दुर्लभ और अद्भुत संग्रह गुरुघर के पैरोकार ही नहीं, सिखिज्म पर शोध करने वालों के लिए भी वरदान साबित होगा। इसका श्रेय सिख धरोहरों को संजोने वाले आर्ट हेरिटेज को जाता है। आर्ट हेरिटेज के मालिक और जीएस सोहन सिंह के बेटे सतपाल दानिश और सुरिंदर सिंह ने विलुप्त हो रही कला को नया रूप दिया है। इसमें सोहन सिंह की तीसरी पीढ़ी के हरदीप सिंह का भी विशेष योगदान है।
 
 
महाराजा रणजीत सिंह के दौर में गुरुद्वारा बाबा अटल राय की दीवारों पर श्री गुरु नानक देव जी का पूरा जीवन वृत्त चित्रों के जरिए उकेरा गया था। इसे फ्रेस्को पेंटिंग (सिख आर्ट) भी कहा जाता है। उस दौर के सिख आर्टिस्टों ने कुदरती रंगों का इस्तेमाल कर पीढ़ियों की मेहनत से इसे तैयार किया था। इन चित्रों के नीचे पूरी साखी अंकित रहती थी। यह कला धीरे-धीरे भारत के अलावा अन्य मुल्कों के गुरुधामों तक पहुंची। बाद में इसको मंदिरों में भी देवी-देवताओं के चित्रों के रूप में निखारा गया। बाद में यह कला आहिस्ता-आहिस्ता विलुप्त होने लगी और आज संकट के दौर से गुजर रही है। इतिहासकारों और कला प्रेमियों की मानें तो इस विधा को महाराजा के समय में वजूद में लाया गया और इसमें सिख चित्रकार भाई केहर सिंह, भाई किशन सिंह, भाई बिशन सिंह, भाई निहाल सिंह, भाई जवाहर सिंह आदि ने रंग भरे थे। भाई निहाल सिंह और भाई जवाह सिंह से इस विधा को सीखा था। भाई ज्ञान सिंह नक्काश और उनके बेटे जीएस सोहन सिंह ने इसे आगे बढ़ाया। 
 
100 पेज की है बुक, 25 प्रतियां बनाईं
 
सतपाल और सुरिंदर सिंह ने बताया कि 40 साल पहले गुरुद्वारा बाबा अटल राय साहिब की दीवारों पर पेंटिंग मुकम्मल रूप में थी। उस दौरान इसकी फोटोग्राफी की गई थी। चूंकि अब यह पेंटिंग विलुप्त होने के कगार पर है, सो उन चित्रों की बुक तैयार की गई है। करीब 100 पेजों की यह किताब साढ़े पांच किलो वजनी है। इसकी सिर्फ 25 प्रतियां तैयार करवाई गई हैं। सबसे अहम बात तो यह है कि इस किताब से बाबा नानक के पूरे जीवन वृत्त को आसानी से जाना जा सकता है। इसे देश की विभिन्न यूनिवर्सिटियां शोध के लिए तवज्जो दे रही हैं।
  
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