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लोन नहीं मिला तो दो माह बाद वेतन मुश्किल

इन्द्रप्रीत सिंह | Aug 22, 2012, 07:02AM IST
 
 


चंडीगढ़।दो महीने बाद पंजाब सरकार के कर्मचारियों के वेतन पर रोक लग सकती है। 30 सितंबर तक पंजाब सरकार 4500 करोड़ रुपए का लोन ले सकती थी पर इससे डेढ़ महीना पहले (15 अगस्त) तक ही इतना लोन ले लिया गया है। 30 अगस्त 2012 तक की देनदारियों का निपटारा करने के लिए पंजाब सरकार ने जब 500 करोड़ के लोन के लिए केंद्रीय वित्त मंत्रालय से संपर्क साधा तो यह कहकर साफ मना कर दिया गया कि राज्य सरकार पहले ही सितंबर तक की लिमिट क्रॉस कर चुकी है। पंजाब सरकार को और लोन देना संभव नहीं होगा। पंजाब सरकार पर 2300 करोड़ से ज्यादा की देनदारियां हैं। इसमें खजाने में 1600 करोड़ की देनदारियां, पावरकॉम को 500 करोड़ की सब्सिडी, व्यापारियों को 131 करोड़ रुपए के वैट रिफंड सहित अन्य छोटी-बड़ी देनदारियां शामिल हैं। समय रहते पैसे का इंतजाम नहीं होने पर दो महीने बाद कर्मचारियों के वेतन और पेंशन पर रोक लग सकती है। समस्या शिअद और भाजपा के बीच टैक्स को लेकर सहमति न बनने के कारण पैदा हुई है।

लोन नहीं..

टैक्स लगाने को लेकर पांच अगस्त को बुलाई गई कैबिनेट बैठक असहमति के कारण रद्द करनी पड़ी थी। बताया जाता है कि अब मीटिंग 28 अगस्त को होगी। उससे पहले मुख्यमंत्री परकाश सिंह बादल को टैक्स लगाने के लिए भाजपा को मनाने की मशक्कत करनी पड़ेगी। मुख्यमंत्री इन दिनों इंडोनेशिया गए हुए हैं। उनके 23 अगस्त को लौटने की संभावना है। कितना खर्च होता है कर्मचारियों पर : पंजाब के पौने चार लाख के करीब कर्मचारियों पर हर रोज 20 से 22 करोड़ रुपए रोजाना खर्च होते हैं। राज्य पर चढ़े 86500 करोड़ रुपए के कर्ज के ब्याज को लौटाने के लिए 6700 करोड़ और 3500 करोड़ रुपए मूल को चुकाने में खर्च हो रहे हैं। राज्य सरकार 13 हजार करोड़ का हर साल कर्ज ले सकती है, इसमें लौटाया जा रहा मूल भी शामिल है। अब क्या हैं विकल्प : 0.5 फीसदी वैट बढ़ाना, एक फीसदी स्टांप ड्यूटी में वृद्धि, ट्रांसपोर्ट टैक्स की दरें रेशनलाइज करना, प्रापर्टी व प्रोफेशनल टैक्स लगाना। रिटारयमेंट एज 60 कर 1000 करोड़ का खर्च दो साल के लिए बचाना। पावर सब्सिडी ४क्क्क्क् करोड़ तक सीमित करना।

नए टैक्स लगाने को कहेंगे

लंदन ओलिंपिक्स के दस दिन बाद लौटे वित्तमंत्री परमिंदर सिंह ढींडसा ने विभागीय अधिकारियों से स्थिति का जायजा लिया। आमदनी और खर्च में हर महीने करीब 800 रुपए का गैप आ रहा है। गैप पूरा करने के लिए अब जहां विकास कार्यो के बिल खजाने में पास नहीं हो रहे हैं वहीं पावर सब्सिडी दो महीने से रोक दी गई है। मुख्यमंत्री के लौटने पर परमिंदर सिंह ढींढसा उनसे बात करेंगे और टैक्स लगाने का रास्ता साफ करने के लिए मनाएंगे।

कैसे होंगे वादे पूरे?बुढ़ापा पेंशन को 600 रुपए करना (अभी 250 रुपए), बेरोजगारों को एक हजार रुपए प्रति महीना स्किल डेवलपमेंट के लिए देना, 12वीं के बच्चों को लैपटॉप या टेबलेट देना।

ये है प्राथमिकता वेतन, पेंशन, बुढ़ापा पेंशन, शगुन और बिजली सब्सिडी सरकार की प्राथमिकता है। इसके अलावा लिए गए कर्ज का ब्याज और मूल को चुकाना भी प्राथमिकता में है। इसके बाद डेवलपमेंट वर्क्‍स के लिए पैसा जारी होता है।

राज्य का दीवाला निकाला मोहालीत्नअमृतसर इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट जमीन घोटाले के आरोपों में फंसे पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह मंगलवार सुबह पेशी के लिए मोहाली पहुंचे। कोर्ट में पेशी के बाद कैप्टन ने मीडिया से कहा कि बादल सरकार ने छह महीने में ही राज्य का दीवाला निकाल दिया है। प्रापर्टी टैक्स के नाम पर लूटने की तैयारी है। उन्होंने कहा कि पंजाब की जनता को अकालियों का असली चेहरा दिखने लगा है। आगे क्या

मुख्यमंत्री परकाश सिंह बादल और उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल के विदेश से लौटने पर टैक्स लगाकर राजस्व बढ़ाने की मुहिम शुरू होगी।

 
 
 

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