विज्ञापन
 
Home >> Punjab >> Amritsar >> Only I Did Not See Mother, The Whole World Has Seen

'बस मैंने नहीं देखी मां, दुनिया ने देख ली'

देवेंद्र पाधा | Dec 19, 2012, 08:17AM IST
 
 

अमृतसर। सोमवार देर शाम करीब साढ़े आठ बजे का वक्त था, जब रेडक्रॉस भवन में लगी अलार्म बैल अचानक बजने लगी। अंदर बैठा चौकीदार पूर्ण सिंह संधू समझ गया कि अंधेरे में एक बार फिर किसी मजबूर मां ने अपनी ममता का गला घोंट जिगर के टुकड़े को पंगूड़े पहुंचा दिया है।
 
संधू ने पंगूड़े में झांक कर देखा तो गर्म कपड़ों में लिपटी नवजात बच्ची रो रही थी। इसे जिस घड़ी अपनी मां की सबसे अधिक जरूरत थी, ठीक उसी समय वह अनाथ की तरह पंगूड़े में पड़ी थी।
 
संधू ने फटाफट मां की ममता से मरहूम नन्ही बच्ची को उठाया और भीतर ले आया। फौरन इस बात की जानकारी रेड क्रॉस सोसायटी के अधिकारियों को दी गई। इसके साथ ही पंगूड़े में पहुंचने वाले शिशुओं की संख्या 62 हो गई।
 
लड़के भी छोड़ जाते हैं लोग
 
सोसायटी की चेयरपर्सन एवं डिप्टी कमिश्नर की धर्मपत्नी रितु अग्रवाल भी फौरन वहां पहुंची और बच्ची को मेडिकल के लिए निकट स्थित पार्वती देवी अस्पताल भेजा। डाक्टरों ने जांच करने उपरांत पुष्टि की है कि बच्ची चार-पांच दिन पहले जन्मी है और पूरी तरह तंदरुस्त है।
 
चेयरपर्सन ने बच्ची को मीडिया के सामने लाया और यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन की ओर से 1 जनवरी 2008 में पंगूड़ा स्कीम शुरू की गई थी। इस स्कीम के अंतर्गत रेड क्रॉस दफ्तर के बाहर पंगूड़ा स्थापित किया गया, ताकि मजबूरी वश कोई अपने बच्चे को यहां-वहां न छोड़कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचा सके। इस नवजात बच्ची के आगमन के साथ यहां आने वाले शिशुओं की संख्या 62 हो गई है। इसमें पांच लड़के भी शामिल हैं। अग्रवाल ने कहा कि बच्ची को जल्द पालन-पोषण के लिए सरकार द्वारा घोषित संस्था के हवाले किया जाएगा।
 
इस वर्ष आए 10 बच्चे
 
उक्त बच्ची समेत इस वर्ष पंगूड़े में आने वाले शिशुओं की संख्या दस हो गई है, जिसमें से दो लड़के हैं। जन्माष्टमी के दिन पंगूड़े में नन्हा लड़का पहुंचा था, तो नवरात्रों में यहां दो बच्चियां आईं। 
सोसायटी आगे पालन-पोषण के लिए बच्चों को शिशु गृह ट्रस्ट नारी निकेतन, जालंधर अथवा स्वामी गंगानंद धूरी वाले इंटरनेशनल फाउंडेशन धाम, लुधियाना के सुपुर्द करती है। वहां से बच्चों को गोद भी लिया जा सकता है।
 
बेटी हूं, इसलिए पालने में पटककर चले गए
 
ओ! मां
जब आंखें खोलीं तो 
तेरी ही खुरदुरी हथेलियों का स्पर्श 
चाहा था मैंने 
कोख में थी जब, तो कोई बुदबुदाया था
ईश्वर को पिता पुकारते हैं,
बेटी हूं ना मां, इसलिए 
पैदा होते ही तुम दोनों मुझे
पालने में पटककर चले गए?
 

आपके विचार
 
 
कोड:
1 + 9

 
Ad Link
विज्ञापन
विज्ञापन
 
 
 
 
Sabse Bada Match Fixer Contest
 
 

बड़ी खबरें

रोचक खबरें

विज्ञापन

बॉलीवुड

जीवन मंत्र

क्रिकेट

बिज़नेस

जोक्स

पसंदीदा खबरें

Email Print Comment
Email Print Comment