मौके पर पहुंचे थाना प्रभारी कुलविंदर सिंह ने शव कब्जे में लेकर केस दर्ज कर लिया है। नवजन्मा बच्चा पूरी तरह विकसित था, जिससे कयास लगाया जा रहा है कि किसी कुंवारी मां ने लोक-लाज के डर से फेंका होगा।
यह अभी सुनिश्चित नहीं हो पाया है कि बच्चे की वहां पड़े-पड़े मौत हुई या उसे मृत अवस्था में वहां फेंका गया। लेकिन घटनास्थल के आसपास के लोगों का कहना है कि उन्होंने बच्चे की रोने की आवाज नहीं सुनी। पुलिस ने तमाम नर्सिग होम एवं पता-ठिकानों पर दबिश दी, ताकि बच्चे की मां को ढूंढा जा सके, लेकिन खबर लिखे जाने तक सफलता नहीं मिली थी।
पंघूड़े में छोड़ देने से जिंदगी तो बच जाती
बच्चा फेंकने वाली मां चाहे कितनी भी लाचार एवं मजबूर रही हो, मगर उसकी सच्ची ममता होती तो वह ऐसा न करती। वह तमाम मजबूरियों एवं बंदिशों के बावजूद ऐसा आश्रय जरूर ढूंढती, जिससे बच्चे की जान बच जाती और इंसानियत भी कलंकित नहीं होती।
सरकार ने भी इसी उद्देश्यपूर्ति के लिए रेडक्रॉस भवन में पंघूड़ा लगाया है, ताकि लोग ऐसे अपराध से बच सकें। फिर चाहे नवजात लड़की हो या लड़का, मजबूर मां उसे यहां छोड़ सकती थी। पंघूड़े ने ऐसे ही बच्चे एवं बच्चियों की जिंदगी बचाने में अहम भूमिका निभाई है।
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