मान ने बताया, करीब चौदह साल उम्र थी। आंखों में दर्द उठता था। उधोवाल के एक डाक्टर के पास गए। उसने आंख में कोई गलत दवा डाल दी। रोशनी चली गई। बेटे की आंखों के आगे अंधेरा देख पिताजी तड़प उठे थे। रोशनी वापस लाने के लिए तमाम प्रयास किया। लंबे इलाज के बाद एक चौथाई रोशनी लौटी। इसी बीच पिता का देहांत हो गया। घर में आर्थिक तंगी छा गई।
रिश्तेदारों ने नेत्रहीन का फायदा उठा जमीन पर कब्जा कर लिया। बहन और मां की जिम्मेदारी कंधे पर आ गई। दवा छूट गई इसलिए जो रोशनी वापस आई थी वह भी चली गई। मजदूरी करना भी मुश्किल हो गया। अपने पराए हो चुके थे। साथ था तो सिर्फ हौसला। कपूरथला में उस्ताद राम सिंह की शागिर्दी में तबला बजाना सीखा। दो साल के साधना के बाद श्री हरमंदिर साहब में तबला बजाने की एक सौ रुपए की नौकरी कर ली।
यहीं से अवतार सिंह मान के जीवन में बदलाव का सिलसिला शुरू हो गया और उन्होंने अपना रागी जत्था बना लिया। करीब 15 साल तक श्री हरमंदिर साहब में सेवा करने के बाद अपने रागी जत्थे के साथ वर्ष 1975 में इंग्लैंड चले गए। वहां गुरुद्वारे में शबद कीर्तन का काम शुरू कर दिया।
वर्ष 1988 में उन्होंने अपनी तरह के नेत्रहीन लोगों के लिए फगवाड़ा में गुरु नानक मिशन नेत्रहीन वृद्ध आश्रम की स्थापना के लिए 12 कनाल जमीन खरीद ली। लोगों की मदद से वर्ष 1991 में निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया। आज वहां नेत्रहीन और बेसहारा लोगों के लिए पचास कमरे बन चुके हैं और करीब सौ की संख्या में लोग रहते हैं। अवतार सिंह मान का मानना है कि जो अपना हौसला छोड़ देते हैं वह कभी कामयाब नहीं होते।
हर छह माह में चार हफ्ते के लिए आते हैं आश्रम
अवतार सिंह मान की व्यक्तिगत जिंदगी भी थोड़ी उलझी हुई है। उनकी पहली शादी वर्ष 1960 में हुई थी, लेकिन पारिवारिक कारणों के चलते तलाक हो गया। बीस साल बाद उन्होंने दूसरी शादी की। अवतार सिंह मान की पहली बीवी उनके गांव उधोवाल जालंधर में रहती है, जबकि दूसरी बीवी उनके इंग्लैंड वाले घर में रहती है। पहली वाली बीवी से एक लड़का है जो कनाडा में ट्रांसपोर्ट का बिजनेस करता है।
अवतार सिंह मान अपने आश्रम के लिए पूरे साल विभिन्न देशों का दौरा कर फंड एकत्रित करते रहते हैं। अभी तक वह करीब 16 देशों का दौरा कर चुके है। हर छह माह में चार हफ्ते के लिए वह आश्रम आते हैं और उसकी प्रगति का समीक्षा करते हैं। 72 बसंत देखने के बाद भी अभी तक मान के हौसले में कोई कमी नहीं है। वह जोश के साथ कहते हैं कि हौसला ही मेरे जीने का सहारा है।