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आयुर्वेद विभाग : रिकार्ड तो गायब हुआ ही, आंकड़े देने में भी गड़बड़ी!

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अजमेर.आयुर्वेद निदेशालय ने प्रदेश में 378 ग्रामीण आयुर्वेद चिकित्सकों का चयन करने के बाद रिकार्ड ही गायब नहीं हुआ, बल्कि राज्य सरकार को गलत आंकड़े भिजवाकर संविदा पर लगे ओबीसी वर्ग के एक दर्जन आयुर्वेद चिकित्सकों को नियमित होने से वंचित कर दिया। रिकार्ड नहीं मिलने के कारण उच्च न्यायालय ने ग्रामीण आयुर्वेद चिकित्सकों के चयन व नियुक्ति को अविधिक करार देते हुए पुन: नए सिरे से चयन प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश देने की पालना पर दोबारा से साक्षात्कार भी कर लिए गए लेकिन ओबीसी वर्ग के संविदा पर लगे चिकित्सकों का कोई धणी-धोरी नहीं रहा।
 
आयुर्वेद विभाग ने संविदा पर लगे आयुर्वेद चिकित्सकों को नियमित करने के लिए ग्रामीण आयुर्वेद, होम्योपैथी, यूनानी एवं प्राकृत सेवा नियम 2008 का गठन किया था। संविदा पर कार्यरत 309 चिकित्सकों को नियमित करने के लिए 320 पदों की विज्ञप्ति जारी की और बाद में 60 अतिरिक्त पद दिए गए थे। 380 में से दो चिकित्सकों ने फॉर्म नहीं भरा और 378 चिकित्सकों का साक्षात्कार किया जाना था। 
 
आयुर्वेद निदेशालय के कार्मिकों ने विभाग में कार्यरत संविदा आयुर्वेद चिकित्सकों के ओबीसी वर्ग के चिकित्सकों की संख्या 86 ही बताई, जबकि वास्तविकता में इनकी संख्या 98 थी। इससे एक दर्जन संविदा चिकित्सकों को नियमितीकरण से वंचित रख दिया। नियमितीकरण से वंचित आयुर्वेद चिकित्सक डा. राजू राम काला ने आरटीआई के तहत भर्ती में चयन का आधार, अंकों का विभाजन एवं अपनी स्वयं की मेरिट मांगी तो तत्कालीन आयुर्वेद निदेशक डॉ कनक प्रसाद व्यास ने भर्ती का रिकार्ड ही नहीं होना बताया। 
 
रिकार्ड नहीं मिलने के कारण चयन में गड़बड़ी की आशंका को लेकर उच्च न्यायालय ने ग्रामीण आयुर्वेद चिकित्सकों के चयन व नियुक्ति को अविधिक करार देते हुए पुन: नए सिरे से चयन प्रक्रिया शुरू करने के आदेश दिए और उसकी पालना में वापस से चयन प्रक्रिया शुरू कर साक्षात्कार लिए गए हैं।
 
एक तरफ रिकॉर्ड नहीं, दूसरी तरफ फेल
 
'डॉ. मोहम्मद इब्राहिम बनाम राज्य सरकार के केस में राज्य सरकार ने जवाब दिया कि 11 चिकित्सक साक्षात्कार में फेल हो गए। इसका मतलब यह है कि चिकित्सकों का चयन संबंधित रिकार्ड तो बनाया गया लेकिन गलती पकड़े जाने पर उसे गायब किया गया है। इसके अलावा ओबीसी वर्ग के संविदा पर लगे चिकित्सकों की गलत सूचना देकर उन्हें नियमित करने से वंचित रख दिया गया है।'
  
डॉ. राजू राम काला, संविदा आयुर्वेद चिकित्सक
 
संबंधित अधिकारियों को दी चार्जशीट
 
'ग्रामीण आयुर्वेद चिकित्सकों के चयन का रिकार्ड नहीं मिलने पर संबंधित अधिकारियों को सरकार ने चार्जशीट दी है। ओबीसी वर्ग के आंकड़े गलत भिजवाए जाने से अगर संविदा आयु चिकित्सक नियमितीकरण से वंचित रहे हैं तो मामले को दिखवाया जाएगा।'
 
- उज्ज्वल राठौड़, निदेशक आयुर्वेद
 

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