श्रीगंगानगर/अजमेर.‘वर्ष 2009 में मेरे बेटे के साथ अन्याय हुआ। अच्छा-भला होने के बावजूद दो डॉक्टरों ने उसके हार्ट में लीकेज बता दिया। जो मेरे साथ हुआ, यह किसी और पिता के साथ न हो। यही सोचकर दोनों डॉक्टरों की राज्य सरकार, मानवाधिकार आयोग, राजस्थान मेडिकल कौंसिल, इंडियन मेडिकल कौंसिल व जिला प्रशासन से शिकायत की। तीन साल बीत गए, न आज तक जांच पूरी हुई और न ही दोषियों के खिलाफ कोई कार्रवाई हुई।अब तो मेरा न्याय से भरोसा ही उठ गया है। कभी-कभी दिल में आता है शिकायतों और पूरी फाइल को आग ही लगा दूं।’
यह दर्द है गजसिंहपुर के श्रवण पूनिया का। उस पिता का, जो अपने बेटे को इंसाफ दिलाने के लिए तीन साल में दर्जनों बार श्रीगंगानगर व जयपुर तक गया लेकिन इंसाफ अब भी कोसों दूर है। बहरहाल, अब इस पिता की गुहार पर मानवाधिकार आयोग ने फिर मामले की जांच शुरू कराई है। इसके लिए प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग का तीन सदस्यीय बोर्ड भी गठित किया गया है।श्रवण पूनिया ने ‘भास्कर’ को बताया कि बेटे आकाश की हृदय की गलत रिपोर्ट तैयार करने के आरोप में उसने डॉ.श्यामसुंदर टांटिया व डॉ.विवेक करीर की शिकायत की थी।
सरकार के आदेश पर सीएमएचओ व पीएमओ ने मामले की जांच की। दोनों ने महीनों जांच करने के बाद डॉक्टरों की कमी मानी लेकिन जांच में कई खामियां भी छोड़ दी। डॉ.टांटिया ने तो बार-बार पत्र लिखे जाने के बावजूद जांच में सहयोग तक नहीं किया। लिहाजा दोनों डॉक्टरों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब उसने दोबारा मानवाधिकार आयोग को शिकायत की, जिस पर मामले की फिर जांच शुरू की गई। पूनिया के मुताबिक, न्याय में देरी का असर यह हुआ कि डॉ.टांटिया का निधन हो चुका है और डॉ.विवेक करीर श्रीगंगानगर छोड़ चुका है और अब पंजाब में प्रेक्टिस कर रहा है।
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