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इन 12 थानेदारों ने खोले ऐसे-ऐसे राज कि सुनकर हर कोई हैरान!

प्रताप सनकत | Jan 07, 2013, 05:33AM IST
इन 12 थानेदारों ने खोले ऐसे-ऐसे राज कि सुनकर हर कोई हैरान!
अजमेर.अजमेर के एसपी व एएसपी को मंथली देने के प्रकरण में लाइन हाजिर किए गए अजमेर के 12 थानेदारों ने पुलिस महकमे के खिलाफ बगावती तेवर दिखाए हैं। सभी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर ‘भास्कर’ के समक्ष कई विस्फोटक जानकारियां दी। थानेदारों ने कहा ‘हमें मारा, तो सब मरेंगे’। हम डिप्टी से लेकर आईपीएस, मंत्री, राजनीतिक दलों तक को मंथली देते हैं। इन दलों की रैलियां, उनके भोजन के पैकेट, भीड़ ले जाने के लिए गाड़ियां कौन उपलब्ध करवाता है। 
 
हमने मुंह खोला तो प्रदेश के 30-40 आईपीएस भी निपट जाएंगे। इनमें एसीबी के अफसर भी तो शामिल हैं। ये 12 थानेदार वो हैं जिनके नाम दलाल रामदेव ठठेरा से बरामद पर्ची में एसपी राजेश मीणा के घर एसीबी को कार्रवाई के दौरान मिले थे। इन सभी को शनिवार को लाइन हाजिर कर दिया गया था। रविवार को पुलिस परीक्षा का आयोजन पूरा होने के बाद इन सभी ने थाने छोड़ दिए।
 
लाइन में आमद कराने के बाद थानेदारों ने महकमे के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया।हालांकि अभी इनमें से कोई भी खुलकर मीडिया के सामने नहीं आ रहा है। ‘भास्कर’ ने इन थानेदारों में से कुछ से पूरे प्रकरण का सच जानने के लिए संपर्क किया तो सभी फट पड़े। इन थानेदारों ने नाम नहीं छापने का भरोसा दिया तो कई विस्फोटक राज उगले। 
 
बंदरबांट में किसका कितना हिस्सा 
 
थानेदार रिश्वतखोरी में जितना अपने क्षेत्र के सट्टेबाजों, माफियाओं, शराब, ड्रग तस्करों या अन्य प्रकार से कमाते हैं उसकी लगभग 90 फीसदी जानकारी एसपी को होती ही है। इसके पीछे एक बड़ा कारण यह होता है कि हर एसपी प्रत्येक थाने में अपने भरोसे के एक दो सिपाही या एएसआई आदि तैनात करता ही है जो थाने में होने वाली प्रत्येक घटना, तोड़-बट्टे, स्याह-सफेद की जानकारी एसपी को देता ही है। इसके बावजूद कुछ मामलों में थानेदार अपने भरोसे के लोगों के जरिए कई उलट फेर कर लेते हैं। जो भी कमाई होती है उसे इस तरह बांटते हैं- 
 
उप अधीक्षक- 25 फीसदी यानी चार आने 
 
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक-25 फीसदी 
 
एसपी-25 फीसदी 
 
थानेदार-25 फीसदी 
 
थानेदारों ने बताया कि थानेदार को अपने 25 फीसदी हिस्से में से बहुत सारी बेगारें भी अफसरों की करनी पड़ती हैं। 
 
बरसों से दोनों दल भी ले रहे हैं 
 
थानेदारों ने कहा कि हम हमारे अफसरों के लिए ही नहीं, अफसरों और ऊपर के आकाओं के कहने पर प्रदेश की दोनों बड़ी राजनीति पार्टियों के नेताओं, मंत्रियों को भी तो हिस्सा देते हैं। दोनों दलों ने जब भी कोई रैली, सभा आदि की है उसका खर्चा पुलिस और कुछ और सरकारी विभागों पर ही तो थोपा जाता है। कार्यकर्ताओं के भोजन के पैकेट तक पुलिस के मत्थे मढ़े जाते हैं। 
 
 
डायरियों में दर्ज है हिसाब 
 
थानेदारों ने बताया कि किसको कितना देते हैं इसका हिसाब हर थानेदार अपनी-अपनी डायरियों में रखता है। उनके पास पिछले 20-20 साल की डायरियां पड़ी हैं जिनमें डिप्टी से लेकर आईपीएस तक का हिसाब दर्ज है। हमें मारा तो हम सबको नंगा कर देंगे। हमने जिन लोगों को मंथली दी उनमें से कई तो अब डीआईजी, आईजी, एडिशनल डीजी तक बने बैठे हैं। इनमें एसीबी के अफसर भी शामिल हैं।
 
 

गौरतलब है कि थानों से मासिक वसूली को लेकर एसीबी द्वारा की गई कार्रवाई में नामजद एएसपी लोकेश सोनवाल को राज्य सरकार ने शनिवार को निलंबित कर दिया। उधर, अजमेर के निलंबित एसपी राजेश मीणा और एएसपी सोनवाल को हर माह बंधी देने वाले अजमेर के 12 थाना प्रभारियों को हटा दिया गया है। इनमें 7 अजमेर शहर,4  ग्रामीण क्षेत्र व एक ट्रैफिक इंस्पेक्टर शामिल है। 
 
आगे की स्लाइड्स में देखिये इन थानेदारों को किया लाइन हाजिर>>>

 

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