जयपुर.टोंक रोड पर बी-2 बाईपास चौराहे के पास रविवार शाम को बाइक सवार एक युवक को टक्कर मारने के बाद वैन चालक मदद के बजाय मौके पर गाड़ी छोड़कर भाग गया। सड़क पर लहूलुहान हालत में तड़प रहे युवक को पहले राहगीरों ने संभाला। उसके बाद पहुंचे यातायात पुलिसकर्मी युवक की गंभीर हालत देखकर उसे टक्कर मारने वाली वैन में डालकर खुद ही जयपुरिया अस्पताल ले गए, लेकिन वहां इमरजेंसी में उसे इलाज नहीं मिला।
वहां मौजूद अस्पताल कर्मचारियों ने उसे बाहर से ही तुरंत एसएमएस अस्पताल ले जाने के लिए कहा। इस पर पुलिसकर्मी उसे एसएमएस ले गए, जहां इलाज के बाद उसकी जान बचाई जा सकी।
जानकारी के अनुसार दुर्घटना में गंभीर घायल राहुल शर्मा (29) सेक्टर 5, प्रताप नगर में रहता है। शाम करीब 4 बजे वह बाइक पर सांगानेर की तरफ से आ रहा था। टोंक रोड पर बी 2 बाईपास चौराहे से कुछ पहले नजदीक चल रही वैन की चपेट में आने से राहुल गिर पड़ा। सिर में गहरी चोट लगने से खून बहने लगा। वह सड़क पर तड़पने लगा। यह देखकर राहगीर इकट्ठा हो गए।
इनमें कुछ ने एंबुलेंस को फोन किया, लेकिन एंबुलेंस के आने में देरी होने पर कुछ राहगीरों ने राहुल को उठाकर डिवाइडर पर लेटा दिया। इसके बाद बी-2 बाईपास चौराहे पर तैनात हैड कांस्टेबल गिरिराज प्रसाद के साथ ट्रैफिक कांस्टेबल मुकेश मीणा व अशोक कुमार ने टक्कर मारने वाली वेन का गेट खोला। फिर राहगीरों की मदद से राहुल को वेन में लेटाकर जयपुरिया अस्पताल पहुंचाया।
...उसके बाद खुद स्ट्रेचर खींच घायल को इमरजेंसी में ले गए, डॉक्टर मिला ही नहीं
कांस्टेबल मुकेश मीणा ने बताया कि जब वह जयपुरिया अस्पताल के इमरजेंसी में पहुंचे तो खुद स्ट्रेचर लेकर आए। वहां इमरजेंसी में एक पुरुष और एक महिला कर्मचारी थे। उन्होंने वैन में मौजूद राहुल के सिर और कान को देखा। गंभीर हालत देख उन्होंने बाहर से तुरंत एसएमएस अस्पताल ले जाने के लिए बोल दिया। उन्हें इमरजेंसी में कोई डॉक्टर नहीं दिखाई दिया। इसके बाद वह और उनके साथी पुलिसकर्मी ने राहुल को एसएमएस अस्पताल के इमरजेंसी में पहुंचाया। सूचना मिलने पर उसके परिजन भी अस्पताल पहुंच गए।
अस्पताल का तर्क है...
'जयपुरिया अस्पताल की इमरजेंसी यूनिट में दोपहर 2 से रात 8 बजे की शिफ्ट में दो डॉक्टर व अन्य स्टाफ रहता है। मरीज के सिर में गंभीर चोट लगने पर उसे तत्काल न्यूरो सर्जिकल इंटरवेंशन व सीटी स्कैन की जरूरत थी। अस्पताल में ये सुविधा नहीं होने पर कर्मचारियों ने उसे एसएमएस अस्पताल भेजने की सलाह दी होगी।'
-डॉ. वीडी शर्मा, पीएमओ, जयपुरिया अस्पताल
फोटो: अनिल शर्मा