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जीन चिप बताएगी दवाइयों के साइड इफेक्ट्स

 
Source: प्रणीता भारद्वाज   |   Last Updated 05:13(10/02/12)
 
 
 
 
जयपुर. आगामी सालों में जीन चिप दवाइयों के साइड इफेक्ट्स और असर के बारे में बताएगी। इससे दवाइयों के साइड इफेक्ट्स को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। जापान और ताइवान यह डायग्नोस करने के लिए ऐसी चिप डवलप कर चुके हैं। अब दिल्ली स्थित एम्स में इस चिप को डवलप करने पर रिसर्च शुरू हो चुकी है।


यह जानकारी एम्स के फार्माकोलॉजी डिपार्टमेंट के हैड डॉ. वाई.के. गुप्ता ने दी। वे गुरुवार को बिड़ला ऑडिटोरियम में शुरू हुई डर्माकॉन-2012 में हिस्सा लेने आए। डॉ. गुप्ता ने बताया कि ट्रीटमेंट के दौरान हमें यह मालूम नहीं चल पाता कि किस दवाई का साइड इफेक्ट हो रहा है। किस दवा का सबसे ज्यादा असर हो रहा है। हर बीमारी का एक ही ट्रीटमेंट होता है।


वही ट्रीटमेंट सभी लोगों को दिया जाता है। जबकि हर व्यक्ति के जीन में अंतर होता है। इस अंतर के कारण हर पेशेंट में दवाइयों का असर और साइड इफेक्ट्स भी अलग-अलग होते हैं। यह जेनेटिक स्टडी में पाया गया है। इसमें मॉलिक्यूलर डायग्नोसिस कर तीन बड़े फायदे मालूम किए जा सकते हैं। कौनसी दवाई किस मरीज को असर करेगी और किस मरीज को नहीं। किसमें घातक साइड इफेक्ट्स होंगे। किसमें यह असरदायक होगी?


मिर्गी के पेशेंट्स को कारवामाजापिन दवाई दी जाती है। इस दवाई से 1 से 10 परसेंट लोगों में गंभीर रिएक्शन देखने को मिलते हैं। इसके साइड इफेक्ट से पेशेंट में स्टीवन जॉनसन सिंड्रोम हो जाता है। इससे दस परसेंट मरीज की डेथ हो जाती है। ऐसा एचएलए-1502 जीन की वजह से होता है। जिन पेशेंट्स में यह पाया जाता है।


उनमें रिएक्शन होने से यह सिंड्रोम बनने से डेथ हो जाती है, लेकिन इस चिप के जरिए दवाइयां देने से पहले पेशेंट के जीन डायग्नोस किया जा सकता है। उसी जीन के हिसाब से दवाइयां देकर साइड इफेक्ट्स को रोका जा सकता है।


इसके माध्यम से जापान और ताइवान में 1000 मरीजों में से 90 परसेंट साइड इफेक्ट्स काबू किए गए हैं। हार्ट अटैक के बाद ब्लड को जमने से रोकने के लिए दी जाने वाली दवाइयों से साइड इफेक्ट्स होते हैं। इससे बॉडी में ब्लीड हो जाता है। इसके अलावा कैंसर, किडनी फेलियर में इम्यून सपरेशन सिस्टम के लिए दी जाने वाली दवाइयों से होने वाले साइड इफेक्ट्स को रोका जा सकता है।


एड्स व कुष्ठ रोग पर ध्यान देने की जरूरत


चिकित्सा राज्य मंत्री डॉ. राजकुमार शर्मा ने कॉन्फ्रेंस का औपचारिक उद्घाटन करते हुए कहा कि लेप्रोसी (कुष्ठ रोग) व एड्स के मरीजों की स्थिति को देखते हुए नई रिसर्च व ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। नेशनल स्तर पर हो रही इस कॉन्फ्रेंस में इन बीमारियों के इलाज पर विस्तृत चर्चा करनी चाहिए।
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
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