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Home >> Rajasthan >> Jaipur >> News >> Former Judges Have Unique Ideas, Something Should Be Done With Perpetrators
पूर्व जजों ने दिया अनोखा सुझाव, कुछ ऐसा किया जाए दुष्कर्मियों के साथ...
Bhasker news
| Dec 30, 2012, 18:14PM IST

जयपुर. दिल्ली की घटना के बाद पूर्व जजों और विशेषज्ञों ने कहा है कि दुष्कर्मियों की संपत्ति को जब्त करने का कानून बनाया जाना चाहिए। इसी से पीडि़ता को मुआवजा दिलाने तथा उसे इलाज का खर्चा भी इसी से पूरा किया जाए।
सरकार की ओर से भी तत्काल सहायता के रूप में राहत राशि दी जाए। प्राथमिक इलाज की जिम्मेदारी भी सरकार को लेनी चाहिए।
दुष्कर्म की पीडि़ता को दिए जाने वाली सरकारी राहत के राशि के भी समान नहीं होने को भी कानूनविदों ने उचित नहीं माना है।
स्कूलों में नियुक्त हों साइकोलॉजिस्ट
दुष्कर्मी की संपत्ति जब्त कर कुर्क होनी चाहिए। इससे पीडि़ता को मुआवजा दिया जाए। यह प्रावधान नए कानून में शामिल हो। कोर्ट अभी कानून के बिना ऐसा कोई फैसला नहीं दे सकता। स्कूलों में साइकोलॉजिस्ट की नियुक्ति की जाए।
- जस्टिस वी.एस. दवे, पूर्व जज, राजस्थान हाईकोर्ट।
सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार की
संविधान के अनुच्छेद 21 में सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार की है। अगर वह ऐसा नहीं कर सकती तो मुआवजा देना होता है। पीडि़ता को गरिमा मय जीवन जीने के लिए आर्थिक सहयोग आरोपी की संपत्ति जब्त कर भी दे सकते हैं।
-जस्टिस पाना चंद जैन
पूर्व जज, राजस्थान हाई कोर्ट।
मुआवजा आरोपी से वसूला जाए
अगर क्रिमिनल केस चलता है तो आजकल सजा कम और आर्थिक दंड अधिक लगाया जाता है। अगर ऐसा नहीं होता है तो नए कानून में यह प्रावधान शामिल किया ही जाना चाहिए कि मुआवजा आरोपी से वसूला जाए।
- जस्टिस एस.एन. भार्गव, पूर्व चीफ जज, सिक्किम हाई कोर्ट।
समान हो मुआवजा राशि
दुष्कर्मी की संपत्ति जब्त करने का प्रावधान नहीं है, लेकिन इसे कानून में शामिल किया जाना चाहिए। सरकार की ओर से दिए जाने वाले मुआवजे में भी एकरूपता होनी चाहिए। अभी एक पीडि़ता को पांच लाख रु. तो किसी अन्य को कम राशि देकर ही इतिश्री कर ली जाती है। कोर्ट के आदेश आने में देरी हो जाती है, इसलिए त्वरित राहत के लिए सरकार को मुआवजा देना चाहिए।
- लाडकुमारी जैन, अध्यक्ष, राज्य महिला आयोग, राजस्थान।










