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'भगवान मौन हैं, मतलब यह नहीं कि उनकी भूमि हथिया लोगे'

Bhaskar News | Feb 24, 2013, 00:58AM IST
'भगवान मौन हैं, मतलब यह नहीं कि उनकी भूमि हथिया लोगे'
जयपुर.कोई भू-स्वामी मौन है तो इसका मतलब यह नहीं कि उसकी जमीन पर अतिक्रमण की अनुमति दी जाए। महानगर की एडीजे (18) कोर्ट के जज अजय कुमार शर्मा ने सूरजपोल दरवाजे के बाहर मोहनबाड़ी स्थित भगवान नरसिंहजी महाराज मंदिर की जमीन पर 42 साल से अवैध कब्जा जमाए बैठे प्रभुलाल को आदेश दिए कि वह 2 महीने में इसे खाली करे। 
 
मंदिर को 33 साल की कानूनी लड़ाई के बाद अपनी जमीन मिली है। कोर्ट ने कहा कि मंदिर एक परफैक्चुअल माइनर (अवयस्क) है और उनका मौन रहना स्वाभाविक है। इससे पहले अतिक्रमी प्रभुलाल मीणा ने कोर्ट में दलील दी थी कि वर्षो से कब्जे और पक्के निर्माण के बावजूद मंदिर मौन रहा। 
 
यह इस बात को दर्शाता है कि उसने यह जमीन को अतिक्रमण मुक्त करने का दावा निराधार और वैमनस्यता के कारण किया है। कोर्ट ने इस दलील को खारिज कर दिया और प्रभुलाल मीणा को आदेश दिए कि जमीन के उपयोग व उपभोग में खुद और न ही किसी एजेंट के जरिए बाधा डाले। 
 
अधिवक्ता ओमप्रकाश गुप्ता ने बताया कि नृसिंहजी महाराज मंदिर ने ट्रस्टी नारायणदास और महंत दामोदर दास के जरिए 5 मई 1980 को जिला व सेशन न्यायाधीश जयपुर में प्रभुलाल मीणा के खिलाफ दावा किया था। 
 
इसमें कहा गया था कि मंदिर की जमीन पर कब्जा करने के लिए मार्च 1971 में प्रभुलाल ने एक दरवाजा मंदिर की ओर खोल लिया और जमीन पर पत्थर डाल दिए। मंदिर के तत्कालीन महंत व मैनेजर ने इस कार्रवाई को रोकने का नोटिस दिया, लेकिन फिर भी प्रभुलाल ने 1974 में मंदिर की जमीन पर कब्जा कर लिया।
 
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