हॉल ऑफ फेम:श्वेता मंगल>
सांसें कहीं भी थम सकती हैं। अगर एंबुलेंस समय पर न आए और कुछ हो जाए तो उसकी टीस हमेशा मन में रह जाती है। ब्यावर की श्वेता मंगल ने राज्य में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत 108 एंबुलेंस सेवा शुरू की। 16 साल पहले मेयो कॉलेज से 12वीं पास करने वाली श्वेता स्कूल खोलना चाहती थी। उसने 1994 में राजस्थान छोड़ा और 2000 में अमेरिका के रोचेस्टर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से एमबीए किया।
भारत लौटने के बाद जीटीवी और कई एमएनसी में जॉब भी की, लेकिन समय को कुछ और ही मंजूर था। अपनी सहेली की मां के साथ 2003 में हुए हादसे ने उसकी जिंदगी के मकसद को ही बदल दिया।