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...और मुख्यमंत्री के सामने अनसुना रह गया एक मां का दर्द!

Bhaskar News | Aug 28, 2012, 04:20AM IST
 
 

जयपुर.मुख्यमंत्री आवास पर जनसुनवाई के दौरान सोमवार को एक मां का दर्द अनसुना ही रह गया। वजह ये रही कि यह मां जिस बेटी की पीड़ा लेकर आई थी, वह मारे दर्द के कराह उठी तो सुरक्षाकर्मियों ने उसे बारिश में ही वहां से तत्काल हटा दिया।

बाद में उस महिला के भाई ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन देने की कोशिश की तो सुरक्षाकर्मियों ने उसे बाहर कर दिया। मुख्यमंत्री कार्यालय के बाहर सुबह छह बजे से प्रदेशभर से आए लोग 3 घंटे तक बारिश में भीगते रहे। कुछ लोगों ने पेड़ों के नीचे रुकना चाहा तो सुरक्षाकर्मियों ने हटा दिया।

वह बारिश में आंसुओं से भीगती रही

बीकानेर की नोखा तहसील के हिम्मतसर से चार साल की मासूम बेटी को लेकर आई राधा सीएम हाउस में अपने भाई श्यामलाल के साथ पहुंची। उसने बताया कि तीन महीने पहले सरपंच पति ने रात में सोते हुए उसे उठाया और दीवार से दे मारा। उसके आठ टांके आए और आंखों की रोशनी चली गई।

वह तीन महीने से जूझ रही है, लेकिन पुलिस मामला दर्ज नहीं कर रही। वह मुख्यमंत्री से अपना दर्द बयां करना चाहती थी, लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने इसलिए बाहर निकाल दिया कि उसकी गोद में पीड़ित बच्ची अचानक रो पड़ी। भाई की बारी आई तो कागज लिया, रवाना कर दिया। कहा-जाओ, कुछ करते हैं। वह अपनी बेटी को लेकर जनसुनवाई से बाहर आई और रोती रही। लोगों ने समझा बारिश में भीग रहे हैं।

चावल के दाने पर अशोक गहलोत

चावल के दाने पर गहलोत का पोट्रेट बनाकर लाए कलाकार कैलाश चंद्र शर्मा। गहलोत दंग रह गए। जितेंद्र प्रताप, अवधबिहारी लाल, महेंद्र प्रताप सहित कई लोग 23 वर्ष से पैदल मार्च कर पर्यावरण संरक्षण व भाईचारे का संदेश दे रहे हैं। वे भी मुख्यमंत्री से मिले। उद्देश्य की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने सीकर के अध्यापक ताराचंद मीणा द्वारा संपादित किताब कन्या भ्रूण हत्या-एक सामाजिक अभिशाप का लोकार्पण भी किया।

बांसवाड़ा के पियूष पंडया ने प्रभाशंकर पंड्या कॉलेज की वार्षिक पत्रिका प्रभा-2012 की प्रति गहलोत को भेंट की। माहेश्वरी पब्लिक स्कूल तिलक नगर के बच्चों के साथ जनसुनवाई में मुख्यमंत्री ने ग्रुप फोटोग्राफ खिंचवाया। अजमेर खेल संघों के प्रतिनिधियों ने ओलंपिक पदक विजेताओं के लिए पुरस्कार की घोषणा पर गहलोत का साफा पहनाकर अभिनंदन किया।

क्या एक तंबू भी नहीं लगवा सकते?

सोमवार सुबह 8 बजे। आठ सिविल लाइंस, मुख्यमंत्री आवास। जनसुनवाई का दिन। प्रदेश भर से करीब डेढ़ हजार लोग सुबह 6:30 बजे से आ चुके थे। बीकानेर से आए एक बुजुर्ग रामजीलाल बोले-क्या मुख्यमंत्री के अफसर सिर्फ सोमवार भर के लिए एक लंबा तंबू नहीं लगा सकते।

जब सोनिया बाड़मेर में तीन दिन बाद आएंगी तो वहां भी तो तंबू लगवाएंगे। उनके पास खड़े भरतपुर के सूरजभान बोले-तंबू तो कार्यकर्ताओं के लिए लगाते हैं। जनता के लिए नहीं। सीकर के बीरबल राम ने कहा कि वह तो दो महीने पहले आया था तो लू चल रही थी। तब भी तंबू नहीं था। अब तो सिर्फ मेह बरस रहा है। बारिश में भीगते हुए सब हंसने लगे।

कुछ करो तो फील भी कराओ

दोनों की उम्र करीब 80 साल। धौलपुर के बाड़ी से आए रामस्वरूप वर्मा व रामढकेला कुशवाह को मुख्यमंत्री ने सुना, लेकिन वे संतुष्ट नहीं हुए। वे दोनों चंबल लिफ्ट सिंचाई योजना लागू करने की मांग और भ्रष्टाचार के खिलाफ 15 जुलाई से धरना दे रहे हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि धरने को खत्म करने के लिए पुलिस ने बलप्रयोग किया। सीएम ने उन दोनों की बात तो सुनीं, लेकिन तसल्लीबख्श जवाब नहीं दिया। ज्ञापन देने आए कुछ बेरोजगार युवकों में से एक ने कहा-बाबाजी, ये सीएम सुनता तो है, पर इसे फील कराना नहीं आता!

पीने के पानी के लिए भी भटके लोग

पूरे प्रदेश से आए करीब सवा तीन सौ लोग बारिश में भीग रहे थे। वहां पीने का पानी भी नहीं था। मोहन को दवा लेनी थी तो पानी के लिए जूझना पड़ा। आखिर एक सिपाही से पानी मिला। मनरेगा में ये नौजवान स्वयं को पक्का करने की मांग कर रहे थे।

उनका कहना था कि अभी इस योजना में कच्चा काम मिला हुआ है। एक ने बताया कि वे प्रशिक्षु सुपरवाइजर हैं, स्थायी होना चाहते हैं। धौलपुर के बालकिशन का तो कहना था कि वह पिछले कई साल से जन सुनवाइयों में आ रहा है।सीएम हाउस के बाहर बारिश के दौरान कतार में लगे लोग। कई तो निराश लौट गए।
 
 
 

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