राजस्थान में पहली बार 'राइट टु रीकॉल' का इस्तेमाल, रचा जाएगा इतिहास

जयपुर/मांगरोल. बारां की मांगरोल नगरपालिका के अध्यक्ष को वापस बुलाने (रीकॉल) के लिए जनमत संग्रह बुधवार को होगा। प्रदेश की जनता को नगर पालिका कानून में बदलाव के बाद दो साल पहले मिले इस अधिकार का मांगरोल में पहली बार इस्तेमाल होगा। जनता वोट डालेगी और तय करेगी कि पालिका अध्यक्ष अशोक कुमार जैन पद पर रहें या नहीं। जैन को 23 नवंबर, 2009 में हुए चुनाव के बाद अध्यक्ष चुना गया था।
क्या थी मुख्य चुनाव में स्थिति
कुल मतदाता - 16,354 : वोट डाले गए - 12,832 (78.46 प्रतिशत)
प्रत्याशी : पार्टी : वोट मिले
देवेंद्र कुमार : बसपा : 298
रफीक अहमद : कांग्रेस : 3,691
सत्यनारायण : भाजपा : 1,800
अशोक कुमार : निर्दलीय : 5,155
मोहम्मद अजहर खान : निर्दलीय : 1,888
पद से हटाने के लिए दबाना होगा खाली कुर्सी वाला बटन
मतदान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन से होगा। जनमत संग्रह में मतदाता को अशोक जैन को पालिकाध्यक्ष रखने के लिए कुर्सी पर बैठे व्यक्ति वाले चिह्न का बटन दबाना होगा। अगर उन्हें हटाना है तो खाली कुर्सी वाला बटन दबाना होगा।
16,535 मतदाता
राज्य निर्वाचन आयोग के आयुक्त ए.के. पांडे ने बताया कि वोटिंग के लिए 21 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। 16,535 मतदाता अपने मत का प्रयोग करेंगे। मांगरोल में सरकारी और निजी संस्थाओं में अवकाश रहेगा।
इसके साथ ही क्षेत्र में सूखा दिवस भी घोषित किया गया है। राजस्थान में रीकॉल के लिए जनमत संग्रह पहली बार मांगरोल में हो रहा है।
आरोप
पालिकाध्यक्ष अशोक जैन पर आरोप है कि उन्होंने पालिका कोष सहित विधायक व सांसद कोष से विकास कार्य नहीं कराया। पालिका में कांग्रेस के 11 भाजपा के 5 और निर्दलीय पार्षद 4 हैं।
अविश्वास
पार्षदों ने इसी साल 12 जनवरी को पालिकाध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था। इसमें कांग्रेस के 10, भाजपा के पांच और दो निर्दलीय सहित कुल 17 पार्षदों ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया था।
सफाई
पालिकाध्यक्ष अशोक जैन का कहना है कि जो पार्षद अविश्वास प्रस्ताव लाए थे, उनमें से कुछ अतिक्रमी थे और गलत काम कराना चाहते थे। उन्होंने स्थानीय विधायक से मिलकर यह काम किया है।
मप्र में 27 बार इस अधिकार का इस्तेमाल
>मप्र ने वर्ष 2000 में ग्रामीण व शहरी निकायों के एक्ट में संशोधन कर राइट टु रीकॉल का अधिकार दिया था।
>सबसे पहले सांची नगर पंचायत अध्यक्ष श्यामा बाई के खिलाफ 2001 में रीकॉल मोशन लाया गया। वे फिर अध्यक्ष चुन ली गईं।
>मप्र में 27 बार इस अधिकार का इस्तेमाल, 14 जनप्रतिनिधि बदले।
15 में से 12 पार्षद उनके खिलाफ थे लेकिन लोकप्रियता के चलते फिर अध्यक्ष बन गईं।






