लेकिन पिछले कुछ सालों से यह फेस्टिवल विवादों के चलते ही ज्यादा ही चर्चित रहा है। कभी मंच से खुलेआम शराबखोरी की जाती है तो कभी विवादित लेखक के प्रतिबंधित किताब के अंशों को पढ़ा जाता है। फेस्टिवल की कई प्रायोजक कंपनियां मानवाधिकार हनन और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के लिए पूरी दुनिया में बदनाम हैं।
इस बार भी फेस्टिवल की शुरूआत विवाद से हुई। पाकिस्तानी लेखकों के आने की खबर और पिछले साल के विवादित लेखकों को यहां बुलाए जाने से कई हिंदू और मुस्लिम संगठनों में गुस्सा है। इतना ही नहीं, विवादित लेखक सलमान रुश्दी से भी आयोजकों ने इस बार किनारा कर लिया है। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के आयोजकों के मुताबिक उन्होंने लेखक अमिताव कुमार और हरि कुंजरू को इसलिए नहीं बुलाया है क्योंकि उनका नाम लिस्ट में नहीं था, लेकिन जीत थईल को बुलाया गया है। आयोजकों के मुताबिक उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला है और साथ ही मैन बुकर पुरस्कार सूची में उनका नाम है.
मुस्लिम संगठनों के साथ ही भाजपा युवा मोर्चा ने भी विवादित लेखकों के फेस्टिवल में शामिल होने पर विरोध का ऐलान किया है। मुस्लिम संगठन अजीमुशान अजमत-ई-नमूसी-ई-रसूल फेस्टिवल के आयोजकों से कह चुका है कि यदि विवादित लेखक यहां आते हैं तो अंजाम अच्छा नहीं होगा। संगठन जीत थायिल, रूचिर जोशी, हरी कुंजरू और अमिताव कुमार का विरोध कर रहे हैं। वहीं, भाजयुमो का कहना है कि वह
सीमा पर दो भारतीय सैनिकों के सिर काटने की घटना को लेकर पाकिस्तानी साहित्यकारों का विरोध करेगा। युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष ऋषि बंसल कहते हैं कि यदि पाकिस्तानी साहित्यकार यहां साहित्यक सम्मेलन में आ गए तो कानून एवं व्यवस्था बिगड़ने की स्थितियों के लिए आयोजक जिम्मेदार होंगे।
फोटो : मनोज श्रेष्ठ
जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल से जुड़ी खास खबरों को पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें
24 जनवरी 2013 की खास खबरें
साहित्य से ज्यादा विवादों के चलते बदनाम हुआ है जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल
जीत के बाद धोनी बोले- कहां गए गोरे, वे क्या सिर्फ नमक मिर्च ही लगाने आते हैं
गीतिका को दुबई ले जाकर शारीरिक शोषण करना चाहता था कांडा
मजिस्ट्रेट ने लड़की से कहा- कपड़े उतारो, विरोध करने पर दी धमकी!
मोबाइल पर इंटरनेट के बाद अब बात करना भी हुआ महंगा
इनकम टैक्स बचाने के सात उपाय