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LPG: केवाईसी फॉर्म का नया वर्जन जारी, सभी को भरना जरूरी
Bhaskar News | Dec 10, 2012, 11:07AM IST

जयपुर.तेल कंपनियों ने केवाईसी फॉर्म का नया वर्जन जारी कर दिया है। कैश सब्सिडी प्राप्त करने के लिए अब यह नया फॉर्म सभी उपभोक्ताओं को भरना होगा। सोमवार से राज्य की सभी गैस एजेंसियों पर इसे उपलब्ध कराया जा रहा है। नया केवाईसी फॉर्म भरने के बाद ही किसी भी उपभोक्ता के खाते में सिलेंडरों की कैश सब्सिडी जमा की जाएगी। यह फॉर्म संबंधित गैस एजेंसी से अथवा तेल कंपनियों की वेबसाइट से डाउनलोड कर प्राप्त किया जा सकेगा। उसे भरकर गैस एजेंसी को देना होगा।
ये देने होंगे प्रूफ
नए केवाईसी फॉर्म में उपभोक्ता के पास जितने भी पहचान कार्ड हैं, उन सभी का उल्लेख करना होगा। जैसे आधार कार्ड, पेन, ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर आईडी, राशनकार्ड, राज्य या केंद्र की ओर से जारी किया गया कोई आई-कार्ड, पासपोर्ट आदि। उपभोक्ता का बैंक अकाउंट लिखना होगा।
उस अकाउंट का एक कैंसिल चेक, बैंक का आईएफएससी कोड, जहां कनेक्शन है, वहां का एक एड्रेस प्रूफ जरूरी। फॉर्म पर ईमेल आईडी, मोबाइल और लैंडलाइन फोन नंबर। कंज्यूमर नंबर के साथ, जन्मतिथि, माता, पिता व पत्नी का नाम लिखने होंगे।
इनमें से एक एड्रेस प्रूफ :
आधार कार्ड, लीज एग्रीमेंट, टेलीफोन/बिजली/पानी बिल, राजपत्रित अधिकारी से प्रमाणित खुद का घोषणा, फ्लैट अलॉटमेंट/कब्जा पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर आईडी, पासपोर्ट, राशन कार्ड, मकान की रजिस्ट्री या बैंक/क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट में से कोई एक।
ऑनलाइन नहीं :
कंपनियों ने फिलहाल यह फॉर्म भरने की ऑनलाइन व्यवस्था नहीं की है। फॉर्म के साथ दिए गए मूल दस्तावेज भी डीलर को दिखाने होंगे। तब ही फॉर्म जमा होगा। इस संबंध में ऑल इंडिया एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स फैडरेशन के अध्यक्ष दीपक सिंह गहलोत का कहना है कि जब सभी प्रकार के फॉर्म भरने की व्यवस्थाएं ऑनलाइन हो रही हैं तो केवाईसी क्यों नहीं।
यदि कोई उपभोक्ता गलत दस्तावेज या असत्य जानकारी देगा तो वह अपने शपथ पत्र को झूठा साबित करेगा और उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकेगी। ऐसे में ऑनलाइन में किसी को कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। ऑनलाइन होने से कंपनियों, उपभोक्ताओं, डीलरों सभी के लिए आसानी होगी।
पहले की ही गुत्थी नहीं सुलझी
राज्य में करीब 65 लाख उपभोक्ता हैं। तीनों कंपनियों के करीब 11 लाख उपभोक्ता पूर्व में संदिग्ध कनेक्शन की श्रेणी में शामिल हुए थे। अभी ऐसे करीब 50 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने ही केवाईसी फॉर्म भरे हैं। यानी केवाईसी फॉर्म के पहले वर्जन की गुत्थी अभी सुलझी नहीं, शेष उपभोक्ताओं के लिए नया संकट खड़ा हो गया। अब संदिग्ध कनेक्शन समेत सभी उपभोक्ताओं को नए वर्जन में केवाईसी भरना होगा। यदि डीलर के पास पुराने फॉर्म हैं, तो वह पहले उनको भरवा सकेगा।







