पहली विफलता-घटता जनाधार
मायने : उप्र में सपा-बसपा ने एससी, एसटी और अल्पसंख्यक वोट बैंक में सेंध लगाई। अगड़ी जातियां भी खिसकीं। बिहार में कोई वोट बैंक नहीं। कर्नाटक में परंपरागत वोटर भाजपा के पास गया। गुजरात में मोदी ने वोट बैंक छीना।
करेंगे क्या : चुनावी साल में एससी, एसटी, अल्पसंख्यकों और मध्यम वर्ग को लुभाने की योजनाएं।
दूसरी विफलता- बढ़ता भ्रष्टाचार
मायने : पार्टी के कई मंत्री भ्रष्टाचार के मामलों में फंसे हैं। इससे अन्ना, केजरीवाल और रामदेव जैसे लोगों ने देश भर में पार्टी के खिलाफ माहौल बना दिया। रॉबर्ट वाड्रा तक आरोप लगे। लोकपाल की मांग होती रही, लेकिन कानून नहीं बना। जवाबदेही जैसा कोई मामला नहीं।
करेंगे क्या? : बजट सत्र में सरकार लोकपाल बिल ला सकती है। भ्रष्टाचार रोकने के लिए नए तंत्र और टेक्नालॉजी पर बात होगी। गवर्नेंस से जुड़े कई सुधारों की घोषणा संभव।
विफलता तीन : महिलाओं पर बढ़ते अत्याचारों को नहीं रोक पाना।
मायने क्या : दिल्ली गैंग रेप की घटना के बाद हुए आंदोलन ने सरकार और पार्टी को हिला दिया। बढ़ते अपराधों की तोहमत सरकार पर। जरूरतों के मुताबिक कानून नहीं होने पर सवाल। जनाक्रोश पर बयानों का मरहम लगाने की कोशिश।
क्या होगा : चिंतन शिविर में महिला सुरक्षा पर सरकार का नया एजेंडा बनेगा। महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर बात। मानसिकता में बदलाव के लिए नई कार्यसंस्कृति पर जोर। नए कानूनी रास्ते सुझाए जाएंगे।
विफलता चार : सोशल मीडिया की चुनौती में खुद को न ढाल पाना।
मायने क्या : हाल के आंदोलनों में फेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब का जमकर इस्तेमाल हुआ। पहली बार बंद का आह्वान सोशल मीडिया के जरिए हुआ। सरकार को इस वर्ग ने जमकर परेशान किया।
करेंगे क्या : सरकार अब सोशल मीडिया फ्रेंडली बनेगी। सरकार और पार्टी में ऐसा तंत्र बनेगा, जो सोशल मीडिया के जरिए लोगों तक अपनी बात पहुंचाएगा।
विफलता पांच : केंद्र के अच्छे कामों को नहीं भुना पा रहे।
मायने क्या : कई राज्यों में, जैसे गुजरात, यूपी, बिहार, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ में केंद्र की अच्छी योजनाओं का क्रेडिट वहां की राज्य सरकारों ने ले लिया। कांग्रेस संगठन के नेता इसे अपनी स्कीम के तौर पर बता ही नहीं पाए।
करेंगे क्या : पार्टी में मॉनिटरिंग सिस्टम का नया तंत्र बनेगा। राहुल गांधी द्वारा युवक कांग्रेस में बनाए गए आम आदमी के सिपाही मॉडल को मूल संगठन में लाया जाएगा।
जो अखर गया
महंगाई पर चुप्पी : सोनिया गांधी ने बढ़ती महंगाई पर कुछ भी नहीं बोला। जबकि पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं की यह सबसे बड़ी चिंता थी।
आज क्या?
चार घंटे चर्चा के बाद अध्यक्ष को सौंपेंगे रिपोर्ट
शनिवार को सुबह साढ़े नौ बजे से डेढ़ बजे तक फिर मंथन होगा। इसके बाद पांचों समूहों के प्रमुख सोनिया गांधी को रिपोर्ट सौंपेगे। शाम छह बजे कार्यसमिति की बैठक होगी। इसमें रिपोर्ट पर चर्चा होगी और आखिरी प्रस्ताव बनाया जाएगा। इसके अलावा राहुल के नए रोल पर भी चर्चा की जाएगी। प्रस्तावों पर रविवार को कार्यकारिणी की बैठक में मुहर लगेगी।
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