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ऑफ द रिकॉर्ड: ‘बिन्द की कोथली’ V/S ‘राजनीति की कोथली’

श्याम आचार्य | Aug 26, 2012, 01:56AM IST
 
 

कोथली’ मायने कपड़े की सिली हुई रंगीन थैली, जिसमें सिक्के और रुपए रखे जाते हैं। बिन्द अर्थात दूल्हा। उसके विवाह समारोह में खर्च होने वाले रुपए-पैसे की इस कोथली (थैली) को परिवार का बुजुर्ग व्यक्ति रखता है। बात तबकी है जब जनता पार्टी नई-नई ही बनी थी। कई विपक्षी राजनीतिक दलों के एक होने पर राजस्थान में इस जनता पार्टी का सबसे बड़ा घटक जनसंघ था। आपातकाल के बाद हुए चुनावों में भी वह सबसे बड़े दल के रूप में उभर कर आया।

उस समय पूर्व सांसद एवं पूर्व भाजपा अध्यक्ष रामदास अग्रवाल के पुश्तैनी मकान (सौंकियों के रास्ते) में जनसंघ विधायकों की एक बैठक हुई। इस बैठक में नेता का चुनाव करना था। जनता पार्टी का आलाकमान जनसंघ के नेता को मुख्यमंत्री बनाना चाहता था, लेकिन संगठन कांग्रेस के प्रदेश नेता मास्टर आदित्येन्द्र भी नेता का चुनाव लड़ना चाहते थे।

भाजपा के नेता सतीश चंद्र अग्रवाल ने नेता पद का चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया था। मास्टर आदित्येन्द्र, सतीश चंद्र अग्रवाल के बड़े भाई थे। तब भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रामदास अग्रवाल ने सतीश चंद्र अग्रवाल से पूछा ‘क्या यह त्याग वे अपने सहोदर ज्येष्ठ भ्राता के लिए तो नहीं कर रहे?

इस पर सतीश जी तमतमाए और रोष भरे शब्दों में कहा यह सही है, मेरे पुत्र की शादी में ‘बिन्द की कोथली’ अवश्य अपने ज्येष्ठ भ्राता को दूंगा, लेकिन ‘राजनीति की कोथली’ उनको कभी नहीं दूंगा। बाद में सर्वसम्मति से भैरोंसिंह शेखावत जनसंघ घटक के नेता चुने गए। एक वरिष्ठ पत्रकार ने यह साक्षात्कार अपनी एक पुस्तक में प्रकाशित किया है।
 
 
 

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