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प्रशासन शहर के संग अभियान: मकान में बनी दुकानों का नहीं मिलेगा पट्टा

Bhaskar News | Dec 12, 2012, 02:01AM IST

जयपुर.प्रशासन शहरों के संग अभियान के दौरान गृह निर्माण सहकारी समितियों की आवासीय योजनाओं में मकान में बनी दुकानों का पट्टा नहीं दिया जा सकेगा। ऐसे मामलों में शिविर के दौरान संबंधित निकाय पूरे भूखंड के क्षेत्रफल का पट्टा जारी कर सकेंगे। अगर ऐसा हुआ तो ये दुकानें एक तरह से अवैध निर्माण अथवा अतिक्रमण की श्रेणी में आ जाएंगी। प्रदेशभर में यह अभियान 25 दिसंबर तक चलेगा। 


 


नगरीय विकास विभाग ने अभियान के दौरान आ रही कठिनाइयों का समाधान करने के संबंध में मांगे गए मार्गदर्शन के जवाब में ये निर्देश दिए हैं। शिविरों में बड़ी संख्या में ऐसे मामले सामने आ रहे थे, जिनमें लोगों ने आवासीय भूखंड में ही दुकान का निर्माण भी कर लिया है। इनमें व्यावसायिक गतिविधियां भी चल रही हैं। निकायों के अधिकारी समझ नहीं पा रहे थे कि ऐसे मामलों में पट्टा आवासीय जारी किया जाए अथवा वाणिज्यिक।


मकान और दुकान का निर्माण तो फिर भी अवैध :


 


जेडीए अधिकारियों का कहना है कि अभियान के दौरान पट्टा केवल आवासीय भूखंड का ही दिया जा रहा है। इस तरह उस पर बना आवासीय अथवा व्यावसायिक निर्माण तब तक अवैध ही है, जब तक उसमें बिल्डिंग बाइलॉज का पूरी तरह पालन नहीं हुआ हो। ऐसी योजनाओं में सामान्यत: सैट बैक नियमानुसार नहीं छोड़े गए हैं।


गृह निर्माण सहकारी समितियों को कानून के मुताबिक वाणिज्यिक उपयोग के लिए पट्टे देने का अधिकार नहीं है। इसलिए यह रास्ता निकाला गया है।



दुकानों के नियमन पर बाद में होगा नीतिगत फैसला : नगरीय विकास विभाग की ओर से जारी परिपत्र में कहा गया है कि आवासीय भूखंड में बनी दुकानों के बारे में बाद सरकार के स्तर पर नीतिगत फैसला किया जाएगा। तब उस फैसले के अनुसार ही कार्यवाही की जा सकेगी।



बढ़े हुए क्षेत्रफल का ले सकेंगे संशोधित पट्टा



प्रशासन शहरों के संग अभियान में अब भूखंड के बढ़े हुए क्षेत्रफल की संशोधित लीज डीड भी जारी की जा सकेगी। ये सुविधा उन कॉलोनियों के लोगों के लिए होगी जिनमें गृह निर्माण सहकारी समितियों ने ले आउट प्लान में भूखंड का साइज मौके की स्थिति से कम दर्शाया हुआ था। अगर सड़कों और अन्य सुविधाओं का क्षेत्र प्रभावित न होता हो तो ले आउट प्लान को जोन स्तर पर संशोधित करके शिविर में मौके पर सोसायटी के ले आउट प्लान के अनुसार बढ़े हुए क्षेत्रफल की संशोधित लीज डीड जारी की जा सकेगी।


 


दुकान का पट्टा इन परिस्थितियों में



शिविर के दौरान उन्हीं मामलों में दुकानों अथवा संस्थानों के पट्टे जारी किए जा सकेंगे जिनका भू-उपयोग मास्टर प्लान में वाणिज्यिक अथवा संस्थानिक दर्शाया हुआ हो। मास्टर प्लान के अनुसार सड़क की चौड़ाई, एफएआर, भवन की ऊंचाई, सैट बैक आदि प्रावधानों का पालन किया गया हो।


 


हाई कोर्ट लगा चुका है रोक



हाई कोर्ट पहले ही रिहायशी क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक लगा चुका है। हाल ही मानसरोवर में भी हाई कोर्ट के आदेशों के बाद नगर निगम ने दुकानों को सीज करने की कार्रवाई की थी। इसके बावजूद सरकार ने प्रशासन शहरों के संग अभियान में मकानों में बनी दुकानों को बंद करने के बजाय उनके नियमन की गली तलाश ली है।


 


सरकार अभी भले ही आवासीय पट्टे दे रही है, लेकिन यूडीएच ने ये संकेत दिए हैं कि भविष्य में मकानों में बनी दुकानों के नियमन का नीतिगत फैसला करने पर विचार होगा।

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