जयपुर.नाग पंचमी पर रविवार जगह-जगह नागदेव की पूजा की गई। कालसर्प दोष निवारण के लिए भक्तों ने नागपाश स्रोत, महामृत्युंजय स्रोत और सर्प सूक्त के पाठ किए और चांदी, तांबे व लोहे के नाग-नागिन बनाकर व अभिषेक कर नदी के किनारे भगवान शिव को अर्पित किया।
कई भक्तों ने शिव मंदिरों में नाग-नागिन के स्वरूप को अर्पित कर नाग देवता को मनाया। परिवार की सुख-समृद्धि और आरोग्य की कामना के लिए महिलाओं ने व्रत रखा। भक्तों ने नाग देव की बांबी पर रोली, मोली, चावल व दूध अर्पित कर विशेष पूजा-अर्चना की।
नाग-नागिन के 31 जोड़े छोड़े :
बंगाली बाबा आत्माराम ब्रह्मचारी गणोश मंदिर ट्रस्ट की ओर से दिल्ली रोड पर बंगाली बाबा की बगीची में सर्पो की पूजा की गई। भगवान भोलेनाथ का अभिषेक किया गया। साथ ही, परंपरागत रूप से विभिन्न स्थानों से आए सपेरों ने सर्पो को अपनी बीन की धुनों पर नृत्य करवाया। इसके बाद यहां एकत्र 31 नाग-नागिनों के जोड़ों को गलता की पहाड़ियों में छोड़ा गया।