जयपुर.मानसून की तेज बारिश से जिला प्रशासन का आपदा प्रबंधन फेल साबित हो गया है। शहर के विभिन्न इलाकों से साथ ही कलेक्ट्रेट परिसर व सामने के गेटों पर भी पानी भर गया। वहीं, जगह-जगह सड़क टूटने के कारण लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी। लोग पानी निकालने के लिए कलेक्ट्रेट, आपदा प्रबंधन व बाढ़ राहत विंग में फोन करते रहे, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली। सड़कों पर गड्ढे होने के कारण भी राहगीरों को परेशानी झेलनी पड़ी।
कलेक्ट्रेट व जिला परिषद के सामने पानी भर जाने के कारण कर्मचारी व आम जन परिसर में जाने के लिए परेशान होते रहे। लोगों ने अधिकारियों से भी इसकी शिकायत की, लेकिन समाधान नहीं हो सका। सड़कों पर भरे पानी को निकालने के लिए बाढ़ राहत विंग की ओर से पंप लगाए गए, लेकिन वे ऊंट के मुंह में जीरा के समान ही रहे।
लोगों ने प्रशासन की आपदा प्रबंधन विंग व बाढ़ राहत विंग के फेल होने पर आक्रोश जाहिर किया है। लोगों का कहना है कि जब कलेक्ट्रेट व अन्य सरकारी दफ्तरों के यह हाल है तो शहर में अन्य जगह की स्थिति और भी खराब है।
बारिश हुई तो याद आए मिट्टी के कट्टे
तेज बारिश आने के बाद जिला प्रशासन को मिट्टी के कट्टे भरने की याद आई। प्रशासन की ओर से एडीएम (प्रथम) ने बनीपार्क में मिट्टी के कट्टे भरवाने की मॉनिटरिंग की। वहीं लोगों ने शिकायत की है कि अधिकांश जगह कटाव होने के बावजूद राहत कार्य नहीं हुए।
ड्रेनेज प्लान : सात साल से फाइलों में बंद
शहर का 1370 करोड़ का ड्रेनेज प्लान पांच साल तक नगर निगम की फाइलों में दबा रहा। पिछले दो साल से जेडीए के बस्तों में बंद है। 2005 में निगम ने ड्रेनेज प्लान बनाया था, जिसकी कंसल्टेंसी पर 55.41 लाख रुपए खर्च हो गए। कंसल्टेंट कंपनी से दो बार संशोधित प्लान बनवा दिया।
केंद्र से जेएनएनयूआरएम के तहत प्लान को स्वीकृति भी मिल गई। लेकिन सरकार और निगम-जेडीए की लापरवाही से आज तक लागू नहीं होने का नतीजा यह रहा कि मंगलवार आधी रात को हुई छह इंच बारिश में ही शहर के 40 फीसदी घरों में पानी घुस गया। 3 जुलाई 2012 को जेडीए ने वेपकोस कंपनी के चीफ इंजीनियर को लिखा कि जेएनएनयूआरएम की गाइडलाइन तथा 2010 की बीएसआर दरों के आधार पर संशोधित ड्रेनेज प्लान बनाकर सबमिट करे।
वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर नाकारा
जेडीए ने ढाई करोड़ रुपए खर्च करके पिछले साल करीब 60 रोड हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर बनवाए। नारायणसिंह सर्किल, स्टेच्यू सर्किल, बाईस गोदाम सर्किल सहित ज्यादातर जगहों पर वाटर लॉगिंग होने से बुधवार सुबह चार से पांच फीट पानी जमा हो गया। स्ट्रक्चर्स के मुंह पर पॉलिथीन और कचरे का मलबा भर जाने से पानी भूगर्भ में नहीं गया। अधिकतर स्ट्रक्चर नाकारा साबित हुए।
5 करोड़ के उपकरण मांगे, नहीं दिए
कलेक्टर नवीन महाजन ने दो माह पहले 4.5 करोड़ के उपकरण मांगे थे, लेकिन सरकार ने कुछ नहीं दिया। सरकार ने स्टेट डिजास्टर रिजर्व फोर्स को कलेक्टर के अधीन देकर कुछ उपकरण देने के आदेश जारी किए हैं। आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव अभय कुमार का कहना है कि पहले खरीदे कई उपकरणों को चलाने वाला कोई नहीं है। हमें ट्रेंड स्टाफ की सूची दे दें, उपकरण उपलब्ध करा देंगे।
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