विज्ञापन
 
 
 
 

'एफआईआर दर्ज कराने का आदेश दो लेकिन संभलकर'

 
Source: Bhaskar News   |   Last Updated 05:40(10/02/12)
 
 
 
 
विज्ञापन
जयपुर. हाईकोर्ट ने कहा है कि मजिस्ट्रेट को सीआरपीसी की धारा 156 (3) के तहत परिवाद पर पुलिस थाने को एफआईआर दर्ज करने का आदेश देने से पहले सावधानी पूर्वक उसका निरीक्षण करना चाहिए।


यदि मजिस्ट्रेट परिवाद के तथ्यों से संतुष्ट हो तो उसे संबंधित पुलिस थाने को एफआईआर के लिए भेजें अथवा उस पर कानूनी प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई करें। न्यायाधीश महेश चन्द्र शर्मा ने यह आदेश लाल चंद की याचिका को खारिज करते हुए दिया। न्यायाधीश ने एसीजेएम सीकर के उस आदेश को बहाल रखा जिसमें प्रार्थी के परिवाद पर एफआईआर दर्ज करने के आदेश देने की बजाय सीआरपीसी की धारा 200 के तहत उसके बयान लेने का निर्देश दिया था।


कोर्ट ने कहा कि कुछ मामलों में न्यायिक मजिस्ट्रेट परिवाद के तथ्यों का निरीक्षण किए बगैर मामले को पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज करने के लिए भेज रहे हैं। हालांकि मजिस्ट्रेट को सीआरपीसी की धारा 156 (3) के तहत पुलिस को मामला भेजने का अधिकार है लेकिन इससे पहले परिवाद के तथ्यों का निरीक्षण करना चाहिए। प्रथम दृष्टया यह देखना चाहिए कि अपराध हुआ है या नहीं।


न्यायाधीश ने हाईकोर्ट के डिप्टी रजिस्ट्रार (न्यायिक) को निर्देश दिया कि वे आदेश की कॉपी सभी जिला व सत्र न्यायाधीशों को भेजें और सत्र न्यायाधीश न्यायिक मजिस्ट्रेट को इस निर्णय से अवगत कराएं। गौरतलब है कि एसीजेएम सीकर ने 23 मार्च11 के आदेश से प्रार्थी लालचंद के परिवाद पर पुलिस को मामला दर्ज करने का आदेश नहीं दिया बल्कि बयान का निर्देश दिया था। लालचंद ने हाईकोर्ट में कहा कि एसीजेएम ने एफआईआर दर्ज करने का आदेश नहीं देकर अधिकार का पालन नहीं किया है।


ये हैं प्रावधान


अधिवक्ता ए.के.जैन के अनुसार सीआरपीसी की धारा 156 (3) के तहत मजिस्ट्रेट को यह अधिकार है कि वह परिवाद को पुलिस थाने को अनुसंधान के लिए भेजे। वहीं सीआरपीसी की धारा 200 के तहत मजिस्ट्रेट परिवादी के बयान ले सकते हैं, जबकि सीआरपीसी की धारा 202 के तहत मजिस्ट्रेट अन्य गवाहों के बयान लेते हैं। मजिस्ट्रेट चाहे तो स्वयं मामले में जांच कर सकते हैं अथवा पुलिस से जांच करवा सकते हैं।


हाईकोर्ट का निर्णय महत्वपूर्ण है और इससे झूठे मुकदमों पर अंकुश लगेगा। वहीं न्यायिक अफसरों को मार्ग दर्शन भी मिलेगा और वे परिवाद में मामला दर्ज करने का आदेश देने से पहले सचेत रहेंगे।


- दीपक चौहान, एडवोकेट, राजस्थान हाईकोर्ट


एक रिटायर व दो मौजूदा जजों के खिलाफ हुए थे आदेश


महानगर की अधीनस्थ अदालत ने दिसंबर 2011 में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के खिलाफ मामले में हाईकोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश महेश भगवती, एस.एस.कोठारी व रिटायर न्यायाधीश गुमान सिंह के खिलाफ पुलिस को केस दर्ज करने का आदेश दिया था। हालांकि हाईकोर्ट ने ही 12 दिसंबर के आदेश से अनुसंधान पर रोक लगा दी।
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
आपके विचार

 
 
कोड :
8 + 2

 
 
विज्ञापन
 

बड़ी खबरें

 
 
 
 
 
 
 
 
 

रोचक खबरें

 
 
 
 
 
 
 
 
 

बॉलीवुड

 
 
 
 
 
 
 
 
 

जीवन मंत्र

 
 
 
 
 
 
 
 
 

क्रिकेट

 
 
 
 
 
 
 
 
 

बिज़नेस

 
 
 
 
 
 
 
 
 

जोक्स

 
 
 
 
 
 
 
 
 

पसंदीदा खबरें

 
 
 
 
 
 
 
 
 

फोटोगैलरी

Most Viewed

रेड हॉट
'ये जवानी है दीवानी'
Just Added

हैलो..हैलो
इफ्तेखार स्मृति में आयोजित नाटय समारोह में रवीन्द्र भवन में बुधवार को नाटक एक ठग।
 
 
 
विज्ञापन
 
 
| Email  Print Comment
| Email  Print Comment