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जिस महल में महाराजा की बन कर आईं थीं महारानी, उसे ही छोड़ना पड़ा

dainikbhaskar.com | Aug 21, 2013, 00:03AM IST
जिस महल में महाराजा की बन कर आईं थीं महारानी, उसे ही छोड़ना पड़ा
जयपुर के पूर्व महाराजा सवाई मानसिंह-II का जन्म 21 अगस्त 1911 को ईसरदा ठिकाने के ठाकुर सवाई सिंह के यहां हुआ था। उनका बचपन का नाम मोरमुकुट सिंह था। मानसिंह जयंती पर जानिए उनसे और गायत्री देवी से जुड़ी कुछ खास कहानियां.  
 
रामबाग की हवाओं में जादू घुला-मिला था, परियों की कहानियों वाला महल, कभी हमारा खूबसूरत, आरामदायक और खुशहाल घरौंदा था। मैं रामबाग में दुल्हन के रूप में आई थी और यह आधी से ज्यादा जिंदगी मेरा घर रहा था। स्व. राजमाता गायत्री देवी के ये शब्द उनके उस लगाव को बयां करते हैं, जो उन्हें रामबाग से था।
 
यह भावुकता उस दौर की है, जब शाही महल, लग्जरी होटल में तब्दील हुआ था। असल में कभी रजवाड़ों का घर रहा यह शाही होटल कई बदलावों से गुजरा है। एक शाही बाग के पांच सितारा होटल में तब्दील होने का यह सफर एक दिलचस्प कहानी है।
  
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