जयपुर. राजीव जैन
घर से कारोबार शुरू, चुनौतियां ही चुनौतियां
पारिवारिक सदस्यों से मिली 70 हजार रुपयों की मामूली राशि, अनुभव की नितांत कमी, नया क्षेत्र, कोई बैकग्राउंड नहीं एवं खर्च बचाने के लिए घर को ऑफिस बनाने की मजबूरी। राजीव जैन के कारोबारी जीवन की शुरुआत कुछ ऐसे ही मुश्किल दौर से हुई।
ज्वैलरी मेकिंग का हुनर सीखने के लिए मित्र के पिता का हाथ थामा। दो साल की कड़ी मेहनत कर इंडस्ट्री की बारीकियो एवं चुनौतियों को समझने के बाद खुद अपना उत्पाद निर्माण करने की ठानी।
पिताजी एवं भाई होजरी के पुश्तैनी काम को बढ़ा रहे थे। 10 कर्मचारियों के साथ 1985 में विकास नाम से स्टोन मैन्यूफैक्चरिंग कंपनी की शुरुआत की। जान-पहचान नहीं होने से पुराने ज्वैलर्स से विश्वास जमाने में काफी समय लगा। कई बार ऐसा हुआ कि ज्वैलरी सेक्टर में नया होने से ऑर्डर मिलते मिलते कैंसिल हो गया।
गद्दी से फैक्ट्री का सफर
दस कर्मचारियों के साथ उद्यमी बनने का सपना देखने वाले राजीव जैन की कंपनी वर्तमान में 700 से अधिक कर्मचारी हैं। वर्ष 1990 में वैभव जेम्स की शुरुआत एवं वर्ष 1996 में देश की पहली जवाहरात कंपनी वैभव जेम्स को स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध किया।
आज से सोलह साल पहले हुई शुरुआत जवाहरात उद्योग में क्रांतिकारी कदम रहा। जयपुर का जवाहरात उद्योग परम्परागत गद्दियों से उठकर फैक्ट्रियों की ओर चला।
कम्प्यूटराइजेशन एवं ऑटोमेशन की शुरुआत का श्रेय भी जैन को मिला। अपने कारोबारी मंसूबों को रफ्तार देते हुए वैभव जेम्स लिमिटेड में अपने हिस्से के शेयर बिक्री कर वर्ष 2001 में जैन ने संभव जेम्स लिमिटेड की नींव रखी। कंपनी वर्तमान में बेस्ट ज्वैलरी एक्स्पोर्टर फर्म में शामिल है।
अवॉर्ड
2006 में गुणीजन अवार्ड। केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा आउट स्टैंडिंग एक्सपोर्ट अवार्ड।
उपलब्धि
जवाहरात उद्योग को संगठित करने में अहम भूमिका। जयपुर के जेम्स-ज्वैलरी सेक्टर को बतौर ब्रांड वैश्विक बाजार में उभारा। दो साल तक ज्वैलरी की शीर्ष संस्था जीजेईपीसी के चैयरमैन।