9200 सीटों के लिए हुई परीक्षा, 141 ने लिया प्रवेश

जयपुर/ कोटा.प्रदेश के 112 मैनेजमेंट कॉलेजों को एमबीए की 9200 सीटें भरने के लिए कॉलेजों को छात्र नहीं मिल रहे हैं। इस साल एआईसीटीई ने पहली बार कॉमन मैनेजमेंट एडमिशन टेस्ट (सीमेट,2012) कराया तो प्रदेश में एक तिहाई से भी कम यानी 3 हजार परीक्षार्थी शामिल हुए। ऑनलाइन काउंसलिंग के पहले चरण में इनमें से मात्र 244 ने ऑप्शन फॉर्म भरे। बाद में 141 विद्यार्थियों ने ही एडमिशन लिया। गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेजों में भी 60 छात्रों के एक बैच में 5 से 10 छात्रों ने ही एडमिशन लिया। यानी 9 हजार से ज्यादा सीटें खाली रह गईं। 21 तक एमबीए में सीधे प्रवेश राज्य सरकार के तकनीकी शिक्षा विभाग ने स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए तत्काल रिक्त सीटें भरने के लिए मैनजेमेंट कॉलेजों को सीधे प्रवेश का अधिकार दे दिया। पहले 20 जुलाई तक रिक्त सीटें भरने का समय दिया गया लेकिन छात्र नहीं मिले तो अंतिम तारीख 31 जुलाई कर दी गई। इसके बाद भी बड़ी संख्या में कॉलेजों में सीटें खाली रह गईं तो दूसरी बार तारीख बढ़ाकर 21 अगस्त कर दी गई। इस साल सीमेट प्रवेश परीक्षा नहीं देने वाले न्यूनतम 45 फीसदी अंकों से ग्रेजुएशन करने वाले विद्यार्थी भी एमबीए में एडमिशन ले सकते हैं। गवर्नमेंट कॉलेज का जीरो सेशन के लिए आवेदन पहली बार ऐसा हुआ कि गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज, भरतपुर ने एमबीए की 60 सीटों पर इस साल सत्र को स्थगित रखने के लिए तकनीकी शिक्षा विभाग को आवेदन भेज दिया। इसके अलावा प्रदेश के 20 से ज्यादा नए प्राइवेट कॉलेजों को छात्र नहीं मिलने से जीरो सेशन के लिए आवेदन कर सकते हैं। जीरो सत्र में कॉलेज की मान्यता बनी रहेगी केवल एक साल के लिए बैच नहीं चलेंगे। एआईसीटीई ने दी ड्यूल डिग्री की अनुमति इंजीनियरिंग कॉलेजों में अगले साल 2013-14 से बीटेक के साथ एमबीए के ड्यूल डिग्री प्रोग्राम भी शुरू किए जा सकेंगे। ऐसे कोर्स में इंजीनियरिंग के साथ ही मैनेजमेंट की पढ़ाई भी कर सकेंगे। आरटीयू में मैनेजमेंट विभाग के प्रमुख डॉ.संजीव मिश्रा के अनुसार, अब केवल एमबीए की डिमांड कम होने से विद्यार्थियों को रोजगार नहीं मिल रहा। ड्यूल डिग्री से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। मैनेजमेंट में फ्लॉप रहा कॉमन टेस्ट एआईसीटीई ने देश के 500 से ज्यादा मैनेजमेंट संस्थानों व बी-स्कूलों में एमबीए व पीजीडीएम कोर्स में दाखिले के लिए पहली बार 61 शहरों में 20 से 28 फरवरी तक ऑनलाइन कॉमन टेस्ट (सीमेट,2012) कराया। इसमें 4 लाख परीक्षार्थियों के बैठने का दावा किया गया था लेकिन इससे एक तिहाई ने भी परीक्षा में भाग नहीं लिया। हालात यह है कि प्रवेश परीक्षा के 5 माह बाद भी मैनजेमेंट कॉलेजों को छात्र नहीं मिल रहे हैं। कोशिश कर रहे हैं कि पूरी सीटें भर जाएं 'खाली सीटों की संख्या से मैनेजमेंट के प्रति कम होते रूझान की झलक मिल रही है। यह बदलता ट्रेंड है। विभाग पूरी कोशिश कर रहा है कि कुछ हद तक सीटें भर जाएं।' राजीव स्वरूप, प्रमुख सचिव, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग






