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ग्रेड थर्ड शिक्षक भर्ती: TET में 55% से कम, तो नहीं दें नियुक्ति

Bhaskar News | Oct 09, 2012, 14:37PM IST
 
 


 



जयपुर. हाईकोर्ट ने आरटेट में 55 प्रतिशत से कम अंक लाने वाले अभ्यर्थियों को तृतीय श्रेणी शिक्षक के अयोग्य माना है। कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिए हैं कि इन्हें नियुक्ति नहीं दी जाए और तीन माह में नई चयन सूची बनाकर जारी की जाए। न्यायाधीश एमएन भंडारी ने शनिवार को विकास कुमार अग्रवाल व अन्य की याचिकाओं पर यह आदेश दिए। 
 
अदालत ने कहा कि चयन प्रक्रिया से पहले आरक्षण का लाभ लेने पर अभ्यर्थी सामान्य वर्ग की वरीयता सूची में शामिल हो सकता है, लेकिन यदि आरक्षण का लाभ चयन प्रक्रिया शुरू होने के बाद लिया तो वह सामान्य वर्ग की वरीयता सूची में शामिल नहीं हो सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि एनसीटीई को न्यूनतम प्राप्तांक में छूट देने का अधिकार है। इससे पहले अदालत ने 10 सितंबर को आरटेट में 55 प्रतिशत से कम अंक धारकों को नियुक्ति देने पर अंतरिम रोक लगा दी थी।
 
एनसीटीई ने 5% अंक की छूट दी थी, सरकार ने 20% तक की दे दी
 
अधिवक्ता विज्ञान शाह ने बताया कि एनसीटीई ने 23 अगस्त, 2010 की अधिसूचना में तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती के लिए न्यूनतम योग्यताओं में टेट को भी शामिल किया था। टेट पास करने के लिए न्यूनतम साठ प्रतिशत अंक की अर्हता रखी और सरकार को छूट दी कि वह मौजूदा आरक्षण नीति के अनुसार आरक्षित वर्ग को छूट दे सकती हैं। 
 
सरकार ने 23 मार्च, 2011 के आदेश से नई नीति बनाकर आरक्षित वर्ग सहित अन्य को आरटेट पास करने के लिए 10, 15 व 20 प्रतिशत तक अंकों की छूट दे दी, लेकिन सरकार केवल मौजूदा आरक्षण नीति के तहत ही अंकों की छूट दे सकती थी और ऐसी छूट की नीति सरकार की नहीं थी। 
 
बाद में एनसीटीई ने 29 जुलाई, 2011 की अधिसूचना से 23 अगस्त, 2010 की अधिसूचना को संशोधित कर आरक्षण नीति घोषित की और आरक्षित वर्ग को न्यूनतम प्राप्तांक 60 प्रतिशत में 5 प्रतिशत अंकों की छूट दी। चूंकि टेट का उद्देश्य देशभर में शिक्षकों के लिए समान योग्यता बनाना था और सभी राज्य सरकारें अधिकतम 5 प्रतिशत अंकों की ही छूट दे सकती थी।
 
गुजरात, पंजाब, हरियाणा, यूपी सहित अन्य राज्यों ने टेट के न्यूनतम प्राप्तांक में 5 प्रतिशत अंकों की छूट दी, लेकिन तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती में राजस्थान सरकार व जिला परिषदों ने 29 जुलाई, 2011 की अधिसूचना के विपरीत जाकर टेट के न्यूनतम प्राप्तांकों में पांच प्रतिशत से ज्यादा छूट दे दी और ऐसे अभ्यर्थियों को नियुक्तिके योग्य माना। 
 
इसे हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए कहा गया कि आरक्षित व अन्य वर्गो को अंकों की ज्यादा छूट देने के कारण उनका चयन नहीं हो सका, लिहाजा 55 प्रतिशत से कम अंक धारकों को नियुक्तिनहीं दी जाए।  
 
 
आरटेट-2012 में भी 55 प्रतिशत से कम अंक धारकों को प्रमाण पत्र जारी करने पर रोक
 
हाईकोर्ट ने 25 सितंबर के आदेश से आरटेट-2012 में 55 प्रतिशत से कम अंक धारकों को प्रमाण पत्र जारी करने पर रोक लगा रखी है। अदालत ने माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, अजमेर को निर्देश दे रखे हैं वह आरटेट, 2012 में 55 प्रतिशत से कम अंक धारक अभ्यर्थियों को उत्तीर्ण होने का प्रमाण पत्र जारी नहीं करे। 
 
गौरतलब है कि सरकार ने आरटेट 2012 की विज्ञप्ति में भी आरक्षित वर्ग सहित विधवा, तलाकशुदा, निशक्त व अन्य वर्ग को पांच प्रतिशत से ज्यादा छूट दी और इस आधार पर ही 9 सितंबर को आरटेट की।

 



 
 
 

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