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स्वाइन फ्लू के लिए भी सर्दी-खांसी जैसे इंतजाम.

Bhaskar News | Feb 20, 2013, 02:36AM IST
स्वाइन फ्लू के लिए भी सर्दी-खांसी जैसे इंतजाम.
जयपुर.न मास्क, न चेतावनी बोर्ड, न ही अलग से इलाज की कोई व्यवस्था। मंगलवार को एसएमएस अस्पताल पहुंची स्वास्थ्य मंत्रालय दिल्ली की टीम नाराज हुई। 
 
कहा-लोगों की क्या बात करें, स्टाफ में ही स्वाइन फ्लू को लेकर जागरूकता नहीं है।..ये अलग बात है कि स्वाइन फ्लू के संदिग्ध मरीजों के लिए बने वार्ड की जांच के दौरान खुद केंद्रीय टीम के सदस्यों ने भी बचाव के उपाय नहीं किए।
 
चार साल पहले सामने आई संक्रामक बीमारी का प्रकोप इस वर्ष बढ़ता जा रहा है। प्रदेश में 151 और अकेले जयपुर में 15 मौतें इस बीमारी से हो चुकी हैं। पॉजिटिव केस रोजाना आ रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय की टीम एसएमएस अस्पताल पहुंची तो अस्पताल प्रशासन भी नींद से जागा। टीम को दिखाने के लिए तुरत-फुरत इंतजाम किए। 
 
स्टाफ भी पर्सनल प्रोटेक्शन इक्यूपमेंट (पीपीई) से लैस हो गया। फिर भी संक्रमण फैलने के खतरों, आशंकाओं और व्यवस्थाओं की खामियों पर भी केन्द्रीय टीम की नजर चली ही गई। स्वाइन फ्लू सस्पेक्टेड वार्ड, भर्ती वार्ड, आईसीयू आदि जगह स्टाफ से बातचीत, मरीजों के ट्रीटमेंट डॉक्यूमेंट और अस्पताल की व्यवस्थाओं की परख में लापरवाही के एक के बाद एक सामने आती गईं। 
 
टीम के सदस्य डॉक्टरों को टोकते रहे, डॉक्टर साफ-साफ जवाब तक नहीं दे पाए। केन्द्रीय टीम के दौरे के दौरान भास्कर टीम भी पूरे दिन साथ रही। पड़ताल में फ्लू को लेकर अस्पताल प्रशासन की दिखावटी तैयारियां और महामारी फैलने के डर के कई उदाहरण मिल गए।
 
डेडिकेटेड स्टाफ क्यों नहीं है? 
 
केन्द्रीय टीम ने वार्ड में मौजूद स्टाफ से तैयारियों और मरीजों के बारे में जानकारी मांगी। स्टाफ ने जानकारी देने में काफी समय लिया। टीम मेंबर डॉ. पीके वर्मा ने वजह पूछी तो एक डॉक्टर ने कहा- पेशेंट मेरा नहीं, किसी दूसरी यूनिट का है। वर्मा चौंके, फिर सवाल उठाया- ‘यहां कोई डेडिकेटेड स्टाफ क्यों नहीं है!’ डॉक्टर जवाब नहीं दे पाए। तुरंत संबंधित यूनिट के डॉक्टर को बुलाया। इस टीम ने ट्रीटमेंट डॉक्यूमेंट पर अधूरी जानकारी पर भी टोका। 
 
स्टाफ ही बीमारी के बारे में ट्रेंड नहीं 
 
सस्पेक्टेड वार्ड से निकलकर टीम दो-तीन चुनिंदा डॉक्टरों के साथ नीचे वार्ड के लिए लिफ्ट से आती है। टीम के एक मेंबर ने कहा- ‘यहां का स्टाफ ही सस्पेक्टेड केसेज के बारे में साफ तौर पर नहीं बता पा रहा, आम लोगों को कैसे बता पाएंगे।’ एक डॉक्टर ने सफाई दी-‘हमने स्वाइन फ्लू की जानकारी देने वाले साइन बोर्ड लगा रखे हैं।’ टीम सदस्य, ‘बोर्ड तो कुछेक जगह पर ही होंगे। स्टाफ को ट्रेंड करने की जरूरत है।’ 
 
जल्दबाजी में बिना तैयारी आ गया 
 
टीम मास्क आदि लगाकर वार्ड में पहुंची। स्टाफ भी मास्क, ग्लव्स आदि के साथ उन्हें फॉलो करने लगा।वहां जानकारी लेने के बाद टीम बाहर निकलकर कुछ ही दूरी पर पहुंचती है कि एक रेजिडेंट और एक अन्य स्टाफ वार्ड में बिना मास्क, ग्लव्ज के घुस गए। कुछ देर अंदर रहने के बाद फिर बाहर निकले।भास्कर प्रतिनिधि ने टोका तो कहा- ‘छोटी सी जानकारी लेनी थी, जल्दबाजी में आया हूं।’ 
 
टीम ने आपत्ति की और साइन बोर्ड बनकर आ गया 
 
स्वाइन फ्लू वार्ड, आईसीयू (कॉमन आईसीयू में ही) आदि जगह पर स्वाइन फ्लू से संबंधित जानकारी देने वाले साइन बोर्ड नजर नहीं आने पर टीम ने टोका। वार्ड के बाहर सामान्य दिशा-निर्देश के बोर्ड दिखे तो फिर टोका। टीम अस्पताल अधीक्षक कक्ष में पहुंची तो पीछे-पीछे एक स्टाफ कर्मी ‘स्वाइन फ्लू ओपीडी’ वाली तख्ती लिए पहुंच गया।
 
हां, जागरूकता का अभाव है 
 
एसएमएस अस्पताल अधीक्षक डॉ. वीरेंद्र सिंह से सवाल 
 
>आज अस्पताल में स्वाइन फ्लू की तैयारियां आदि को देखने के लिए दिल्ली से जांच दल आया, उन्होंने क्या बताया? 
 
उन्होंने अभी रिपोर्ट नहीं दी है।
 
>उनके दौरे से पहले और कुछ देर बाद के हालात ही बताते हैं कि जैसे उनको दिखाने के लिए कुछ तैयारियां की गईं, उनके जाते ही डॉक्टर, कंपाउंडर स्वाइन फ्लू वार्ड आदि में सामान्य तरीके से घूमते दिखे? 
 
स्टाफ में जागरूकता की कमी है।
 
>उन्हीं में जागरूकता नहीं है तो सामान्य लोग कैसे सतर्क होंगे, उनकी देखादेखी दूसरे लोग भी इस बीमारी के संक्रमण को लेकर लापरवाह हो जाते हैं? 
 
हां..इसके लिए हम जल्द ही एक सी-एमई (सतत मेडिकल शिक्षा कार्यक्रम) आयोजित करेंगे।
 
>2009 में जब पहली बार स्वाइन फ्लू आया तो इसके मरीजों को संक्रामक रोग चिकित्सालय में रखा गया, लेकिन अब ऐसा नहीं करने की क्या वजह है? 
 
(थोड़ा रुककर). तब एकदम से ज्यादा मरीज आ गए थे, इसलिए वहां व्यवस्था की थी। अब जब ज्यादा मरीज आएंगे तो वहीं भेजेंगे।
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