जयपुर.सेहतमंद जिंदगी के लिए बेहद जरूरी है स्वस्थ किडनी। इसके लिए किडनी को एक्यूट इंजरी से बचाया जाना चाहिए। वर्ल्ड किडनी डे 2013 की यही थीम है। इस मौके पर सिटी रिपोर्टर ने शहर के नेफ्रोलॉजिस्ट से जाना कि किडनी फेलियर से कैसे बचा जा सकता है। शहर में किडनी ट्रांसप्लांट की स्थिति क्या है, ट्रांसप्लांट के लिए किस तरह के डोनर सामने आ रहे हैं?
पिछले कुछ सालों से जयपुर में किडनी ट्रांसप्लांट के केसों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, लेकिन अब भी 85 से 90 फीसदी महिलाएं ही किडनी डोनर हैं। अब महिलाएं पति को भी किडनी डोनेट कर रही हैं। ऐसे ट्रांसप्लांट में सफलता भी मिल रही है, जबकि अभी तक यही माना जाता था कि ब्लड रिलेशन के सदस्यों की किडनी पेशेंट्स को ट्रांसप्लांट की जानी चाहिए। इससे किडनी के रिजेक्शन की आशंका खत्म हो जाती है।
किडनी ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ.ए.के.शर्मा ने बताया कि अब किडनी ट्रांसप्लांट के सिनेरियो में बदलाव आ रहा है। कुछ साल पहले तक जहां ब्लड रिलेशन का डोनर पहली प्राथमिकता होती थी, वहीं बेहतर दवाइयां आने से अब अन्य रिश्तेदारों की किडनी भी डोनेट किए जाने से ट्रांसप्लांट के बाद सफल हो रही है। सिर्फ पति-पत्नी का ब्लड ग्रुप एक होना चाहिए।
जहां इम्युनो सप्रेशन दवाइयों के कारण किडनी रिजेक्शन में कमी आई है, वहीं दूसरी ओर 20 से 30 साल आयु वर्ग में किडनी फेलियर के केस बढ़ रहे हैं। इस उम्र के पेशेंट्स को बचाने के लिए मां डोनर के रूप में आगे आ रही हैं।