राज्यदिल्ली
मध्य प्रदेश
राजस्थान
छत्तीसगढ़
हिमाचल
पंजाब
हरियाणा
चंडीगढ़
उत्तर प्रदेश
बिहार
झारखंड
महाराष्ट्र
गुजरात
जम्मू-कश्मीर
एसीजेएम के खिलाफ अवमानना खारिज याचिकाकर्ता पर एक लाख का जुर्माना
Bhaskar News
| Jan 25, 2013, 06:20AM IST
जोधपुर.राजस्थान हाईकोर्ट ने एक याचिकाकर्ता की ओर से पाली के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) के खिलाफ दायर अवमानना याचिका को खारिज करते हुए याचिकाकर्ता पर गलत ढंग से अवमानना याचिका दायर करने पर एक लाख रुपए कॉस्ट (जुर्माना) लगाया है।
जुर्माना एक माह में अदा नहीं करने पर याचिकाकर्ता को एक माह की जेल का प्रावधान है। यह आदेश न्यायाधीश डॉ. विनीत कोठारी ने पाली निवासी याचिकाकर्ता राजेश सिंघल बनाम सत्यपाल वर्मा के मामले का निस्तारण करते हुए दिए।
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में कहा गया कि उसने 6 अगस्त 2011 को हाईकोर्ट में पेश होकर अपने खिलाफ सीआरपीसी की धारा 82, 83 के तहत चल रहे मामलों को खत्म करने की गुहार लगाई थी। हाईकोर्ट ने उसे संबंधित मजिस्ट्रेट के सामने उपस्थित होने व उसी समय उसके जमानत आवेदन पर विचार करने के आदेश दिए थे।
बहरहाल जब उसने पाली स्थित एसीजेएम कोर्ट में उपस्थित हो कर जमानत आवेदन पेश किया तो मजिस्ट्रेट ने लोक अभियोजक के आवेदन को पहले मानते हुए उसे पुलिस हिरासत में भेज दिया। बाद में दूसरे दिन उसके जमानत आवेदन पर सुनवाई की गई तथा आवेदन को खारिज कर दिया गया।
याचिकाकर्ता लंबे समय से फरार था
अप्रार्थी एसीजेएम की ओर से अधिवक्ता राजेश पंवार ने कहा कि याचिकाकर्ता लंबे समय से फरार था व उसकी संपत्ति कुर्की की कार्यवाही चल रही थी। ऐसे में वह जब हाईकोर्ट के समक्ष पेश हुआ तो हाईकोर्ट ने यह कहते हुए उसके आवेदन को स्वीकार नहीं किया कि उसे संबंधित मजिस्ट्रेट के समक्ष ही सरेंडर करना होगा।
साथ ही हाईकोर्ट ने सरेंडर करने के साथ ही जमानत आवेदन पेश करने पर संबंधित मजिस्ट्रेट द्वारा उस पर विचार करने के भी निर्देश दिए थे। पंवार ने कहा कि अप्रार्थी मजिस्ट्रेट ने याचिकाकर्ता के सरेंडर करने के साथ ही उसके जमानत आवेदन को विचारार्थ स्वीकार करते हुए उसपर नियमानुसार कार्यवाही की।
लंबे अरसे से फरार मुजरिम के सरेंडर करने पर वहां कोर्ट में लोक अभियोजक की ओर से मुजरिम को पुलिस कस्टडी में लिए जाने का भी आवेदन पेश किया गया तथा मजिस्ट्रेट ने सोच विचार करते हुए कानूनी प्रावधानों की पालना की।
इसमें कहीं भी हाईकोर्ट के आदेशों की अवमानना नहीं की गई। अदालत में इस पर याचिकाकर्ता पर गलत ढंग से एसीजेएम के खिलाफ अवमानना दायर करने को गंभीरता से लेते हुए याचिकाकर्ता पर 1 लाख रुपए की कॉस्ट लगाते हुए याचिका खारिज कर दी।






