लाशों के मंजर में आंसू लिए ढूंढती आंखे ...काश! कोई निशानी मिल जाए!

चितलवाना (जालोर) .कुछ अधजली लाशें तो कुछ ऐसी स्याह कि पहचानना भी मुश्किल। फिर भी परिजन जुटे हैं कि शायद कोई निशानी दिख जाए जिससे अपनों की पहचान हो जाए। शवों की शिनाख्त होते ही चीत्कार से गूंज उठता है परिसर। जिनके परिजन की पहचान नहीं हुई उनके आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे। चितलवाना के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में यही हालात हैं। सिवाड़ा के पास हुए हादसे में काल कवलित हुए 19 लोगों के शवों को स्वास्थ्य केन्द्र की मोर्चरी में रखवाया गया है। शुक्रवार रात से डेरा जमाए बैठे मृतकों के परिजन व रिश्तेदार शवों की शिनाख्त नहीं कर पा रहे थे।
मृतक विष्णु का शव लेने आए खेताराम ने बताया कि शव पूरी तरह से जल चुका था, हाथ में पहने कड़े से बमुश्किल शिनाख्त हो पाई। ट्रेलर के ड्राइवर श्रवण निवासी झंवर जिला जोधपुर का शव भी अध जला मिला। बड़ी मुश्किल से उसकी पहचान हुई। रामजी की गोल से आए कुछ लोग शव की शिनाख्त नहीं होने पर शनिवार शाम तक चितलवाना में जमे थे। उधर, इस हादसे में घायल हुए लोगों का सांचौर के अस्पताल में उपचार चल रहा है। अस्पताल में उनकी कुशलक्षेम पूछने वालों का तांता लगा है।
न खाने की सुध न पानी की.
चितलवाना पीएचसी पहुंचे परिजनों को न खाने की सुध रही न पानी पीने की। पूरी रात आंसुओं में बीती।
बुझ गए चिराग, घरों में चूल्हे नहीं जले.
सड़क हादसे में जिले के एक दर्जन लोग अकाल मौत के शिकार हो गए। लंगेरा, पीपराली, कोजा, भूणिया, केरिया, पोलियाली में शनिवार को कोहराम मच गया। शवों की शिनाख्त के बाद यहां लेकर आए। जहां अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान घरों में चूल्हे नहीं जले।
संवेदनहीनता की पराकाष्ठा.
प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र चितलवाना में शुक्रवार रात को मृतकों के शव रखे गए। शनिवार सुबह छह बजे भास्कर टीम मौके पर पहुंची तो वहां बाड़मेर जिले के प्रशासनिक अधिकारी तथा स्थानीय पुलिस अधिकारी व जवान मौजूद थे। सुबह साढ़े नौ बजे तक एक भी स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी नहीं पहुंचा तो मृतकों के परिजनों ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि हम तो शवों को लेने आए हैं। लेकिन कोई जिम्मेदार अफसर नहीं है।









