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सीवरेज प्लांट के नाम पर 13 प्रतिशत टैक्स
Bhaskar News | Jul 30, 2012, 05:38AM IST
जलदाय विभाग ने अप्रैल माह से पानी के बिलों में यह राशि जोड़ दी है। हैरानी वाली बात यह है कि नगर निगम जिस ट्रीटमेंट प्लांट के नाम पर वसूली कर रहा है, वहां आधे शहर का पानी तो ट्रीटमेंट के लिए पहुंचता ही नहीं है।
जानकारी के अनुसार जेडीए ने सालावास में पचास एमलडी क्षमता का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाया है। इसे दिसंबर 2011 में शुरू किया गया। शहर के कई हिस्सों का गंदा पानी यहां पर आकर ट्रीट होता है। इसके बाद उसे जोजरी नदी में छोड़ा जाता है।
नया प्लांट शुरू होने के बाद नगर निगम के अधीक्षण अभियंता ने जलदाय विभाग के अधीक्षण अभियंता को पत्र लिखकर कहा कि शहर के सीवरेज से जुड़े सभी क्षेत्रों से सीवरेज राशि के साथ ही सीवरेज ट्रीटमेंट की 13 प्रतिशत अतिरिक्त राशि वसूलनी शुरू करें। इसके बाद जलदाय विभाग के तीनों खंडों ने पानी के बिलों में 20 जगह 33 प्रतिशत राशि जोड़कर भेज दी।
पानी के बिलों में बीस की जगह तैंतीस प्रतिशत राशि आने से एकबारगी उपभोक्ता भी चौंक पड़े। नगर निगम सीवरेज के नाम पर जनता से पहले से करीब साढ़े तीन करोड़ रुपए सालाना वसूल रहा है।अब 13 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने से यह राशि लगभग पांच करोड़ रुपए तक पहुंच गई है।
अप्रैल से बिलों में जुड़ गई राशि
'जलदाय विभाग सीवरेज के अलावा सालावास ट्रीटमेंट प्लांट के लिए पानी के बिलों की 33 प्रतिशत राशि अप्रैल से वसूल रहा है। नगर निगम व सरकार के निर्देश पर ऐसा किया जा रहा है।'
- प्रेमसुख शर्मा, अधीक्षण अभियंता जलदाय विभाग
पानी के बिल में राशि जोड़कर कर रहे हैं वसूली
सीवरेज नहीं फिर भी वसूल रहे पैसा
शहर के बाहरी क्षेत्रों में आज भी कई जगह पर सीवरेज लाइन नहीं है। फिर भी सीवरेज एवं ट्रीटमेंट प्लांट का पैसा जनता से वसूला जा रहा है। चांदणा भाखर, झालामंड, चौपासनी के आसपास, बासनी, पाबूपुरा, भदवासिया क्षेत्र की कई गलियों व मोहल्लों में आज भी सीवरेज की लाइनें नहीं हैं। नगर निगम इनसे भी सीवरेज के नाम पर वसूली कर रहा है।
..और यहां से नहीं जाता सालावास तक पानी
मधुबन हाउसिंग बोर्ड व कुड़ी भगतासनी क्षेत्र के कई इलाकों के साथ ही झालामंड व बासनी सहित कई क्षेत्रों के सीवरेज का पानी सालावास ट्रीटमेंट प्लांट तक जाता ही नहीं है। कुड़ी भगतासनी का पानी तो चैनल बनाकर सांगरिया गांव की एक नाडी में डाला जा रहा है। यहां से इसे जोजरी नदी में छोड़ा जाता है। डिगाड़ी के सैनिकपुरी की ओर निकलने वाले नाले का पानी भी खेतों में जा रहा है। सवाल यह उठता है कि जब कई क्षेत्रों के सीवरेज का पानी ट्रीटमेंट प्लांट में पहुंच ही नहीं रहा है तो अतिरिक्त टैक्स किस बात का लिया जा रहा है।
खुद की आय से ट्रीटमेंट प्लांट चलाना आसान होता है
'सालावास व नांदड़ी में बनाए गए ट्रीटमेंट प्लांट के लिए जलदाय विभाग के बिलों में 13 प्रतिशत राशि वसूल रहे हैं। इसके लिए जलदाय विभाग को पत्र लिखे हैं। खुद की आय होने से ट्रीटमेंट प्लांट के संचालन में आसानी रहती है। इससे निगम को सालाना पांच करोड़ के लगभग राशि मिल जाएगी जबकि फिलहाल तीन से साढ़े तीन करोड़ रुपए ही मिल रहे हैं। राज्य सरकार के आदेशानुसार जिन शहरों में ट्रीटमेंट प्लांट नहीं है, वहां बीस प्रतिशत राशि वसूली जाती है। जोधपुर में प्लांट है इसीलिए 33 प्रतिशत वसूल रहे हैं।'
- महेश शर्मा, अधीक्षण अभियंता नगर निगम






