गांधी नगर आवासीय योजना की लॉन्चिंग सात को
Source: Bhaskar News | Last Updated 05:08(04/02/12)
जोधपुर.नगर निगम की गांधी नगर आवासीय योजना की लॉन्चिंग सात फरवरी होगी। शहर में निगम की यह पहली आवासीय योजना है। महापौर रामेश्वर दाधीच के अनुसार मुख्यमंत्री अशोक गहलोत निगम की इस आवासीय योजना की लॉन्चिंग करेंगे। इसके चलते महापौर ने गुरुवार को अधिकारियों की बैठक लेकर उन्हें विभिन्न कार्य सौंपे।
भूखंडों की दरंे तय करने के बाद से ही इस योजना को लॉन्च करने के लिए निगम ने कवायद शुरू कर दी थी। महापौर ने बताया कि इस योजना को कुल छह सेक्टरों में विभाजित किया गया है। योजना में कुल 979 रहवासीय भूखंड होंगे।
इनमें से प्रथम चरण में 646 भूखंड लॉटरी द्वारा दिए जाएंगे। इसके अलावा 333 भूखंडों की नीलामी होगी। राज्य सरकार के आदेशानुसार आर्थिक रूप से कमजोर आय वर्ग को पृथक आवेदन के माध्यम से रियायती दर पर भूखंडों का आवंटन किया जाएगा।
15.75 त्न क्षेत्र में हरियाली होगी
योजना के मुताबिक रहवासीय क्षेत्र में सार्वजनिक पार्क व हरियाली के लिए योजना की कुल भूमि का लगभग 15.75 प्रतिशत हिस्सा आरक्षित रखा गया है।
कुल 200 बीघा जमीन में से 86.54 बीघा रहवासीय, 0.19 बीघा पार्किग, 11.33 बीघा पार्क, 1.59 बीघा स्कूल व 3.80 बीघा वाणिज्यिक उपयोग के लिए है और 76.88 बीघा क्षेत्र में सड़कों का निर्माण हुआ है।
अब तक सवा चार करोड़ रुपए खर्च
निगम ने इस आवासीय योजना में मूलभूत सुविधाओं पर अब तक करीब सवा चार करोड़ रुपए खर्च किए हैं। इसमें रोड नेटवर्क से लेकर रॉक कटिंग तक के सभी कार्य किए गए हैं।
निगम अधिकारियों के अनुसार यह पहली आवासीय योजना होगी जिसमें सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट होगा। इसके साथ ही योजना में एम्यूजमेंट पार्क और पहाड़ी पर स्टेपिंग गार्डन भी प्रस्तावित है।
साढ़े तीन घंटे तक किया अवलोकन
महापौर ने गुरुवार को गांधी नगर आवासीय योजना के संबंध में निगम के सभी आला अधिकारियों की बैठक ली। इसके बाद महापौर ने पार्षद रामसिंह सांजू, शहाबुद्दीन सहित निगम के आला अधिकारियों के साथ गांधी नगर आवासीय योजना का दौरा कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
यूं चली योजना की फाइल
>महापौर रामेश्वर दाधीच ने 7 मई 2010 को प्रस्तुत बजट में इस आवासीय योजना को शामिल किया।
>योजना के सर्वे का कार्य 20 मई 2010 को सिद्ध कंस्ट्रक्शन को सौंपा गया।
>15 जुलाई 2010 को जयपुर में राज्य भू-उपयोग परिवर्तन समिति की बैठक में योजना को हरी झंडी मिली।
>16 अक्टूबर 2010 तक योजना का सेक्टरवार प्लान तैयार किया गया।
>30 अप्रेल 2011 को राज्य स्तरीय प्रदूषण मंडल की बैठक में एनवायरमेंट क्लीयरेंस सर्टिफिकेट जारी किया गया।
>15 मई 2011 को निगम को एनवायरमेंट क्लीयरेंस सर्टिफिकेट मिला। इसके बाद इस योजना के तहत विकास कार्य शुरू किए गए।
>सितंबर 2011 में भूखंडों की दरें तय हुई।
सरकार से अनुमति मिलने की उम्मीद, आवंटन पत्र व रिफंड जारी करने की तैयारी
शहर की सबसे बड़ी आवासीय योजना विवेक विहार के सफल आवेदकों को आवंटन पत्र व 52 हजार से अधिक असफल आवेदकों को रिफंड लॉटरी खुलने के पांच महीने बाद फरवरी में मिलने की उम्मीद है।
जेडीए अधिकारियों की मानें तो इस योजना की जांच रिपोर्ट पर राज्य सरकार का अंतिम निर्णय 10 फरवरी तक आने की उम्मीद है। जेडीए में आवंटन पत्र बनने व रिफंड के लिए आवेदकों की सूची तैयार करने का काम अंतिम दौर में है।
विवेक विहार योजना की लॉटरी गत वर्ष 9 सितंबर को खुली थी, लेकिन इस योजना की लॉटरी में अनियमितताएं सामने आने पर आगे की प्रक्रिया रोक दी गई थी। बाद में पूर्व आईएएस एके खन्ना ने अपनी जांच पूरी कर सरकार को रिपोर्ट भेज दी। जनवरी में इस पर निर्णय होना था।
इसके चलते जेडीए में आवंटन पत्र बनाने व रिफंड के लिए आवेदकों की सूचियां तैयार करने का काम शुरू हो गया, लेकिन अंतिम निर्णय नहीं हो सका। 3227 भूखंडों की विवेक विहार योजना के लिए करीब 55 हजार 361 आवेदकों ने आवेदन किए थे। असफल आवेदकों को 70 करोड़ रुपए से अधिक की राशि लौटाई जानी है।
31 मार्च तक एकत्र करना है राजस्व
जेडीए को इस योजना के भूखंडों के आवंटन से 3 अरब 14 करोड़ से अधिक की राशि मिलेगी। इस राशि का अधिकांश हिस्सा शहर के विकास कार्यो में लगेगा। इसके अलावा विकास कार्यो के भुगतान व क्रियान्वयन के लिए चालू वित्तीय वर्ष में ही राजस्व एकत्र करना होगा। इसमें विवेक विहार योजना के आवंटियों द्वारा भरी जाने वाली राशि की बड़ी भूमिका होगी।