जोधपुर. कंगाली का रोना रोने वाला नगर निगम गृह कर के रूप में बकाया 58 करोड़ रुपए वसूल नहीं कर पा रहा है। उदासीनता का आलम यह है कि पिछले दस माह में निगम सिर्फ 9 लाख रुपए ही वसूल कर पाया है, जबकि कई सरकारी और गैर सरकारी बकायादारों से एकमुश्त लाखों रुपए वसूल हो सकते हैं।
हालांकि राज्य सरकार ने तीन साल पहले गृह कर समाप्त कर दिया था, लेकिन निकायों को बकाया वसूली की छूट दी गई थी। इसके बावजूद निगम कमाई से मुंह मोड़े बैठा है। गृह कर समाप्त होने के बाद निगम की उदासीनता के चलते लोगों ने भी इसे ‘हजम’ मान लिया है।
ये हैं निगम के प्रमुख देनदार
1. होटल उम्मेद भवन पैलेस : 27,93,110 रु.
2. सन आर्ट एक्सपोर्टर्स, झालामंड : 11,32,442 रु.
3. होटल ताज हरि महल (होटल विवांता) : 9,47,497 रु.
4. सर प्रताप सी.सै. स्कूल : 13,42,425 रु.
5. सरदार सी.सै. स्कूल : 20,12,321 रु.
6. हनुवंत सी.सै. स्कूल : 27,61,555 रु.
7. सेंट पॉल स्कूल : 12,61,638 रु.
8. मौलाना अबुल कलाम आजाद स्कूल : 18,88,516 रु.
9. एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज : 73,06,328 रु.
10. जेएनवीयू न्यू कैंपस : 7,02,16,777 रु.
11. जेएनवीयू ओल्ड कैंपस : 60,76,577 रु.
12. कमला नेहरू गल्र्स कॉलेज : 12,52,773 रु.
कुल : 9,90,12,059 रु.
(स्रोत : नगर निगम, बकाया : 31 जनवरी 2012 तक)
वसूली के लिए फौज
राजस्व वसूली के लिए निगम में बड़ी फौज नियुक्त है। राजस्व आयुक्त के अधीन राजस्व अधिकारी और इनके मातहत पंद्रह-बीस निरीक्षक व कर्मचारी हैं। गृह कर ही नहीं, उसके विकल्प के तौर पर लगाया गया नगरीय विकास कर भी पूरा वसूल नहीं हो पा रहा है।
लोग तो भुला बैठे
आम लोगों में धारणा है कि गृहकर तो समाप्त हो गया। अब इसे अदा करने की जरूरत नहीं है, लेकिन निगम ने अब तक यह स्थिति भी स्पष्ट नहीं की है कि बकाया तो अदा करना पड़ेगा।
स्थिति सुधर सकती है
निगम गंभीरता से सोचे तो अकेले गृह कर की वसूली से ही आर्थिक स्थिति काफी सुधर सकती है। इससे शहर के विकास को गति मिल सकती है और निगम की देनदारियां भी कम हो सकती हैं।
हर बार छूट देता है निगम
निगम हर बार वित्तीय वर्ष की अंतिम तिमाही में गृह कर के लिए छूट देता है, लेकिन आम जनता और कई सरकारी महकमों के अधिकारी भी इसे गंभीरता से नहीं लेते और हर बार की तरह निगम की झोली खाली रह जाती है।
कुर्की नोटिस भी निकाले
निगम ने इस बार बड़े देनदारों के खिलाफ कुर्की नोटिस भी जारी किए हैं। निगम सीईओ के अनुसार गृह कर वसूलने के लिए निगम ने करीब 15 दिन पहले 15-20 संस्थानों, होटलों और सरकारी बकायादारों को नोटिस दिए हैं, हैरत की बात यह है कि अभी तक एक भी व्यक्तिने निगम की इस कार्यवाही को गंभीरता से नहीं लिया है।