राज्यदिल्ली
मध्य प्रदेश
राजस्थान
छत्तीसगढ़
हिमाचल
पंजाब
हरियाणा
चंडीगढ़
उत्तर प्रदेश
बिहार
झारखंड
महाराष्ट्र
गुजरात
जम्मू-कश्मीर
दो चचेरे भाइयों की हत्या, न कोई बीच-बचाव में आया न दिलासा देने
भास्कर न्यूज | Aug 10, 2012, 04:33AM IST

एडीसीपी (कानून-व्यवस्था) ज्योति स्वरूप शर्मा ने बताया कि लूणी थानांतर्गत बाणियावास निवासी जगदीश उर्फ जग्गाराम देवासी (50) पुत्र रघुनाथ राम लूणी थाने का हिस्ट्रीशीटर है। उसकी सत्तार मिरासी से पुरानी रंजिश है। जगदीश सत्तार के साथ मेलजोल होने के कारण अपने रिश्तेदार डूंगरराम (45) पुत्र गिरधारीराम देवासी और उसके चचेरे भाई गोपा राम उर्फ आशाराम पुत्र लाबूराम से भी रंजिश रखने लगा था। बताया जाता है कि दो दिन पहले ही इन लोगों ने समाज के लोगों के साथ बैठक कर सत्तार से मेलजोल नहीं रखने की बात पर समझौता भी कर लिया था। बुधवार रात को जगदीश ने गोपा राम (35) व डूंगरराम के घर पर हमला भी किया था।
इससे पहले दोनों पक्षों के बीच कई बार मुकदमे भी हुए थे। गुरुवार दोपहर बाद जगदीश ने शराब के नशे में खेत से लौट रही गोपा राम की मां दाखू देवी और डूंगरराम की मां चम्मू देवी को बंदूक दिखाकर धमकाया। दोनों वृद्धाओं के चिल्लाने की आवाज सुनकर डूंगरराम, आसूराम उर्फ गोपा राम और इनके परिवार की औरतें उन्हें बचाने के लिए दौड़ीं। इसी दौरान जगदीश ने टोपीदार बंदूक से डूंगरराम व गोपा राम पर फायर कर दिया। इससे गोपा राम की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि डूंगरराम को एमडीएम अस्पताल ले जाते समय रास्ते में मौत हो गई।
घटना की सूचना मिलने पर लूणी एसएचओ नितिन दवे की टीम मौके पर पहुंची। बाद में एसीपी (पश्चिम) प्रीति जैन व अन्य अधिकारी भी बाणियावास पहुंचे। इस दोहरे हत्याकांड के आरोपी की तलाश के लिए पुलिस टीमें बनाई गई और पुलिस टीम ने आरोपी जगदीश उर्फ जग्गाराम देवासी को कांकाणी के निकट भागते हुए पकड़ लिया। पुलिस ने दोनों शव एमडीएम अस्पताल की मोर्चरी में रखवाए हैं। शुक्रवार सुबह इनका मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम करवाया जाएगा।
न कोई बीच-बचाव में आया, न दिलासा देने
हिस्ट्रीशीटर जग्गाराम ने शाम करीब 4 बजे डूंगरराम की पत्नी पर हमला किया। गोपाराम व डूंगरराम बीच-बचाव करने पहुंचे, लेकिन गांव का कोई अन्य शख्स उनके झगड़े को देखकर भी आगे नहीं आया। बताया जाता है कि जग्गाराम शराब तस्करी करता था। उसकी झगड़ालू प्रवृत्ति को देखते हुए गांव में कोई भी उसके खिलाफ नहीं बोलता। हालात तो यह थे कि गांव में पुलिस के पहुंचने के काफी देर बाद तक देवासी समाज के अन्य लोग भी मृतक के परिवार को सांत्वना देने नहीं पहुंचे। यहां तक कि मृतकों की पत्नियों को ही शव घर के भीतर लेकर जाने पड़े। हत्या के आरोपी व मृतकों के घर भी गांव में आमने-सामने ही हैं।







