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कंपनी-अफसर मिल गए, सफाई धरी रह गई
Bhaskar News
| Jul 06, 2012, 08:04AM IST
अफसर भी सफाई कर्मचारियों की कमी की बात कहते हुए जिम्मेदारी से भाग रहे हैं। मेरा कहना है कि सरकार सफाई के नाम पर पैसा भी वसूल कर लेगी, लेकिन इस बात की क्या गारंटी है कि मेरे घर के आगे या मेरे इलाके में सफाई होगी ही? अगर सफाई नहीं होगी तो निगम को ठेका फर्म पर कानूनी कार्रवाई करने के क्या अधिकार होंगे? निगम ने पहले भी डोर-टु-डोर वेस्ट कलेक्शन की योजना चलाई, उसका क्या हुआ? जुर्माना लगा तो ठेका फर्म
भाग गई।
ठेका फर्म ने अफसरों से लेकर सफाई कर्मचारियों तक की आदत को बिगाड़ा। अभी यही अहम सवाल है कि मॉनिटरिंग करने वालों को ठेका फर्म खरीदने की कोशिश करेगी। सफाई प्रभारी या अन्य लोग शिकायत करेंगे तो रोकने के लिए ठेका फर्म पैसा बांटेंगी। अगर इस बार पैसा बंटा तो शहर का बंटाधार हो जाएगा।
ठेका फर्म: कनक रिसोर्सेज मैनेजमेंट लिमिटेड (जयपुर)
क्या रही थी स्थिति : ठेका फर्म नगर निगम के वाहनों से डोर-टु-डोर वेस्ट कलेक्शन करने के साथ सभी 65 वार्डो का मलबा भी केरू प्लांट तक लेकर जाती थी। मॉनिटरिंग के अभाव में ठोस कचरे से ज्यादा भवन निर्माण का मलबा होता था। ठेका फर्म सॉलिड वेस्ट कम, मलबा ज्यादा ले जाती थी। इसके बावजूद उसे 711 रुपए प्रति टन से भुगतान हो जाता था। कचरा नहीं उठने पर सफाई प्रभारी व पार्षद संबंधित जोन के मुख्य सफाई निरीक्षक से शिकायत करते थे।
ठेका फर्म: रामकी एनवायरो इंजीनियरिंग (दिल्ली)
क्या रहेगी स्थिति: डोर-टु-डोर वेस्ट कलेक्शन कर 12 किमी. (केरू तक) परिवहन करने पर 829.44 रुपए प्रति टन (स्लैब के अनुसार) के हिसाब से भुगतान होगा। भवन निर्माण के मलबे का परिवहन नगर निगम करेगा। बड़े नालों की सफाई व सफाई अभियान से निकला कचरा भी निगम ही केरू लेकर जाएगा। तीन स्तर पर मॉनिटरिंग होगी। वार्ड प्रभारी, वार्ड समिति (ऑनरेबल) व स्वतंत्र इंजीनियर जांच करेंगे। जुर्माना स्वतंत्र इंजीनियर की रिपोर्ट पर वसूला जा सकेगा।
योजना के बहाने जनता को लूटने की तैयारी
सफाई के नाम पर यूजर्स चार्ज वसूलना जनता से साथ धोखा है। राशि वसूलने के बाद क्या गारंटी है कि सफाई होगी। इसका प्रमाणीकरण कौन करेगा। यह योजना भ्रष्टाचार को ही बढ़ावा देगी।
सूर्यकांता व्यास, विधायक (सूरसागर)
सरकार ने अब नया बोझ जनता पर लाद दिया
सरकार रोज नए-नए कर लगाकर जनता पर बोझ डाल रही है। स्थानीय निकाय अगर इच्छाशक्ति से आय अर्जित करे तो वह इस बोझ को भी उठा सकते हैं। अब जनता सरकार के इस कदम से त्रस्त हो चुकी है।
कैलाश भंसाली, विधायक (शहर)
ठेका फर्म का एक मजबूत मैकेनिज्म है
भास्कर: डोर-टु-डोर वेस्ट कलेक्शन योजना का पहले का अनुभव काफी खराब रहा, इस बार क्या करेंगे कि शहर साफ सुथरा हो सके?
सीईओ: ठेका फर्म के पास खुद का एक मजबूत मैकेनिज्म है, जो यह काम देखता है। इसलिए सफाई की उम्मीद की जा सकती है।
अब सफाई होगी ही, यह दावा आप किस आधार पर कर रहे हैं?
ठेका फर्म के सभी वाहनों पर ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) लगा होने से हर वाहन नजर में रहेगा। शिकायत आएगी तो हकीकत का पता लगाया जा सकेगा।
इस व्यवस्था से फैलने वाले भ्रष्टाचार को कैसे रोकेंगे?
पहले ठेका फर्म को पैसा नहीं मिल रहा था तो उसने वार्ड प्रभारियों के भरोसे सिस्टम को चलाया। अब पैसा मिलेगा तो ठेका फर्म भी काम करेगी।
कंपनी काम न करे, तो यह है रास्ता
योजना के लागू होने के बाद घर से कचरा लेने कर्मचारी नहीं आता है तो आप सीधे सफाई प्रभारी, मुख्य सफाई निरीक्षक या फिर जोन आयुक्त कार्यालय में शिकायत कर सकेंगे। वार्ड समिति भी आपकी शिकायत सुनेगी। शिकायत का सत्यापन प्रदूषण मंडल का इंजीनियर (स्वतंत्र) करेगा। इसकी रिपोर्ट पर ही समस्या का समाधान होगा और ठेका फर्म से शास्ती भी वसूली जाएगी।








