16 साल बाद रानीसर हुआ ओवरफ्लो, देखने के लिए उमड़ पड़ा शहर

जोधपुर.शहर के प्राचीन जलस्रोत रानीसर-पदमसर को देखने के लिए मंगलवार को शहरवासी उमड़ पड़े। सुबह बारिश का दौर शुरू होने के साथ ही लोग पदमसर-रानीसर की तरफ कूच करने लगे।
रानीसर ‘ओटा’ होने की उम्मीद में लोग सुबह 11 बजे तक जमे रहे। ये लोग हाथी नहर से पानी की आवक को देखने के लिए भी बेताब नजर आए। शाम को तेज बारिश के बाद तो पूरा शहर रानीसर की तरफ उमड़ पड़ा। रात साढ़े सात बजे रानीसर ‘ओटा’ (ओवरफ्लो) होने से पानी पदमसर में गिरा तो लोग खुशियां मनाने लगे।
क्षेत्र की महिलाओं ने 16 साल बाद रानीसर के छलकने पर ओटे की पूजा-अर्चना की। पदमसर पहले ही ओवरफ्लो हो गया था। रात में जब रानीसर का पानी पदमसर में गिरने लगा तो सड़कों पर तेज वेग से ओटे का पानी बहने लगा। राजवेदिया पं. संजीव दवे, पं. वीरेंद्र जोशी, मनोज जोशी, धर्मेद्र बोहरा ने बताया कि वर्ष 1996 के बाद पदमसर व रानीसर पहली बार ओवरफ्लो हुए हैं।
इस बार पदमसर पहले ओटा हुआ
हाथी नहर के जगह-जगह क्षतिग्रस्त होने और पहाड़ियों पर आवासीय कॉलोनियां आबाद होने के कारण रानीसर में पानी की आवक कम हो गई। इधर शहर में परंपरागत कुओं व बावड़ियों से पानी का दोहन नहीं होने से पदमसर का जलस्रोत पिछले छह-सात सालों से जस का तस रहा। ऐसे में मूसलाधार बारिश के बाद इस बार पदमसर 15 दिन पहले ही छलक गया।
बारिश की खुशी से किसी को इनकार नहीं, लेकिन उधड़ी सड़कें और बेहाल ड्रेनेज सिस्टम ने लोगों की परेशानी को बढ़ा दिया। 38.9 मिमी बारिश कोई बड़ा आंकड़ा नहीं, लेकिन व्यवस्थाएं सही नहीं होने से शहर हर बारिश में ही लबालब हो रहा है। दोनों सरोवरों का ओवरफ्लो होना खुशहाली का प्रतीक है।
मान्यता है कि रानीसर व पदमसर के ओटा होने पर जमाना अच्छा होता है। महापौर रामेश्वर दाधीच ने लोगों को बधाई दी। वे बुधवार को वहां पूजा-अर्चना करेंगे। पूर्व में 1996 में दोनों जलाशय ओटा हुए थे। फोटो में ऊपर एंजॉय कर रहे अधिकांश लोगों ने बचपन में ओटा देखा था। वहीं पानी में मचल रहे बच्चों सहित पूरी एक पीढ़ी ने ओटा पहली बार देखा ।






