जोधपुर.राजपथ पर आसमान में 20 से 30 सेकंड की वह गौरवशाली उड़ान। लाखों जोड़ी आंखें गवाह। सब मन माफिक हो जाए तो संतुष्टि युद्ध जीतने जैसी। भारतीय वायुसेना की ताकत और शौर्य का प्रदर्शन करने वाली लड़ाकू विमानों की तीन टीमें जोधपुर से उड़ान भरेंगी।
जितना रोमांचक इनका प्रदर्शन देखना होगा, उतना ही रोमांचक है यह जानना कि जिंदगी के सबसे कीमती इन 20 सेकंड की तैयारी में कैसे अपना सब कुछ झोंक देते हैं हमारे जांबाज। 15 दिन तक तैयारी। एक हफ्ते में 15 घंटे उड़ान। एक-एक पल का हिसाब और सब कुछ इसी हिसाब के मुताबिक। भास्कर ने जोधपुर एयरफोर्स स्टेशन पर तीनों टीमों के साथ पूरा दिन बिताया।
1. बेमिसाल ‘बिग ब्वॉय’
ग्रुप कैप्टन एके सिंह के नेतृत्व में 16 पायलट 7 विमान (3 एएन 32, 3 डोर्नियर व 1 आईएल 78)
300 किमी प्रति घंटा की रफ्तार, आपस में सिर्फ 25 से 30 मी. की दूरी पर 5 विमान 1000 फीट ऊंचाई पर राजपथ पर मंच के सामने से गुजरेंगे। सुबह 11:27:30 बजे ये राजपथ पहुंचेंगे। मंच के सामने गुजरने के लिए महज 20 सेकंड। आईएल 78 विमान आज सुबह 9 बजे उत्तरलाई एयरबेस से उड़ान भरेगा, जो आधे घंटे बाद जोधपुर के आसमान में मंडराएगा। 9:30 बजे एएन 32 व डोर्नियर उड़ान भरेंगे। आईएल 78 के साथ बिग ब्वॉय फोरमेशन बनाकर दिल्ली के लिए रवाना होंगे।
युद्ध जीत लेने जैसी संतुष्टि ‘राजपथ पर वो 20 सेकंड हमारे लिए किसी युद्ध जीतने जैसे ही गर्वीले पल होंगे।’
- विंग कमांडर अरुण बाला व अंकुश सहाय (एएन 32 पायलट), विंग कमांडर एसआर दास (डोर्नियर पायलट)
2. तेज तर्रार ‘त्रिशूल’
विंग कमांडर हर्षद मिश्रा, टीम में चार पायलट
4 सुखोई 30 एमकेआई
500 से 700 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से 1000 फीट ऊंचाई से गुजरेगी तीन सुखोई की त्रिशूल टीम। पीछे एक सुखोई स्टैण्ड बाय रहेगा। इससे पहले सुबह 10:30 बजे जोधपुर से चारों विमान उड़ान भरेंगे व 11 बजकर 30 मिनट और 30 सेकंड पर राजपथ के आसमान में मंडराएंगे।
हर सांस जीत का हौसला देती है: ‘इस बीस सेकंड के दौरान हर सांस विजय की ओर बढ़ने का हौसला देती है। लगता है जैसे हम समय को मात देते अपने मिशन पर आगे बढ़ रहे हैं।’
-विंग कमांडर हर्षद मिश्रा, विंग कमांडर सतवीर सिंह, विंग कमांडर डीवी श्रीनिवासन, विंग कमांडर सीवी राव (सभी सुखोई पायलट)
3. अनोखा वर्टिकल चार्ली
विंग कमांडर शरद अनेजा सुखोई के साथ
सुखोई के 10 मिनट बाद चार्ली उड़ान भरेगा
सुबह 10: 40 बजे उड़ान भरकर 11:30 बजे राजपथ के सामने। बीस सेकंड के अपने रेस्पांस टाइम में 30 सेकंड तक धुआं निकालेगा। सात सौ किमी की रफ्तार से उड़ रहा विमान नाइन ग्रेविटी यानी एकदम सीधा होकर आसमां को चीरता हुआ करीब 2 किमी ऊंचा जाएगा। वहां जाते ही लट्टू की तरह घूम जाएगा। यह ढाई राउंड होंगे। यह सब बीस सेकंड में पूरा हो जाएगा।
‘धड़कनें अभी से तेज हैं।’
- विंग कमांडर शरद अनेजा (सुखोई पायलट)
तीनों टीमें वैसे तो 15 दिन से तैयारी में जुटी हैं, लेकिन हफ्ते भर से 2 से ढाई घंटे की उड़ान रोज हो रही है। कागज पर मिनट टू मिनट की प्लानिंग है। सब कुछ उसी हिसाब से होता है।
सुबह 6 बजे उठना होता है। अलार्म लगाना नहीं भूलते। 7:30 बजे ऑपरेशन रूम में। दिल्ली से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग।
अफसरों के साथ पूरी प्लानिंग। कौन कब, ऑन एयर कहां मिलेगा? कब किस एटीसी को पार करना है? इमरजेंसी होने पर क्या तैयारी है, जैसे सवालों के सटीक जवाब। फिर प्री फ्लाइंग डाइट। इसमें कॉर्नफ्लेक्स, अंडा, ब्रेड व चाय। उड़ान को तैयार। मैप और डाटा विमान के कम्प्यूटर में फीड करना।
सभी का मेडिकल चेकअप व सारी तैयारी के साथ टेक ऑफ। उड़ान पूरी हो जाने के बाद रिव्यू। करीब दो घंटे का लंच ब्रेक। फिर ऑपरेशन रूम में। अगले दिन की योजना पर काम।