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मकोका की तर्ज पर चाहिए राज्य में कड़ा कानून

Bhaskar News | Dec 12, 2012, 06:10AM IST
मकोका की तर्ज पर चाहिए राज्य में कड़ा कानून

जोधपुर.महामंदिर के लक्ष्मी नगर इलाके में अपने छोटे बेटे के घर से बड़े बेटे के घर की ओर जा रही वृद्धा की चेन बाइक सवार दो बदमाश लूटकर ले गए। मंगलवार शाम करीब साढ़े छह बजे हुई इतनी संगीन वारदात को भी महामंदिर थाना पुलिस देर रात तक छुपाने के प्रयास में लगी रही। 
 
महामंदिर थाना क्षेत्र के लक्ष्मी नगर ए में रहने वाले अशोक कुमार जैन ने बताया कि उसकी माताजी उगम कंवर (75) पत्नी सायरचंद मंगलवार शाम करीब साढ़े छह बजे कुछ ही दूरी पर स्थित बड़े बेटे के घर की ओर जा रही थी। इसी दौरान पार्क के निकट एक बाइक पर सवार दो बदमाश उनके नजदीक पहुंचे और झपट्टा मारकर दो तोला वजनी सोने की चेन लूटकर भाग निकले। 
 
वे बदमाशों के धक्के से नीचे गिर पड़ीं और उनके घुटने, हाथ व गर्दन पर चोट पहुंची। उनके चिल्लाने की आवाज सुनकर आसपास के लोग एकत्र हो गए और पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने पीड़ित परिवार से इसकी रिपोर्ट तो ली, लेकिन इसे छुपाती रही। 
 

सामान्य चोरी मानती है पुलिस
 
पिछले पांच साल के दौरान चेन स्नैचिंग की सर्वाधिक वारदातें इस साल हुई। औसतन हर दूसरे-तीसरे दिन किसी न किसी महिला की चेन लूट ली गई या उनका पर्स, मोबाइल इत्यादि छीन लिया गया। ऐसे मामलों को संगीन धाराओं में दर्ज करने की बजाय पुलिस सामान्य चोरी की धाराओं में दर्ज करती है। इसका फायदा बदमाशों को मिलता रहा। 
 
वे पकड़े जाने के कुछ समय बाद ही जेल से बाहर आ जाते हैं और फिर से ऐसे ही धंधे में जुट जाते हैं। कई बदमाश तो संगठित रूप से अपराध करते हैं। ऐसे संगठित अपराध को रोकने के लिए ही महाराष्ट्र में ‘मकोका’ यानी महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एक्ट लागू है। कानून के जानकारों की मानें तो राजस्थान में भी मकोका की तर्ज पर कानून (राजकोका) बनाने की सख्त जरूरत है। 
 
क्यों
 
‘मकोका’ में पुलिस को चार्जशीट पेश करने के लिए 90 के बजाय मिलते हैं 180 दिन, 5 साल कैद से लेकर फांसी तक का प्रावधान
 
 
इसलिए सख्त हो कानून : जमानत पर छूटे, फिर चेन तोड़ने लगे
 
 
 
आमतौर पर परिवादी को पुलिस द्वारा टरकाने की शिकायतें सामने आती रहती हैं, लेकिन दिसंबर माह में तो पुलिस अधिकांश मामलों को दर्ज ही नहीं करती। 
 
सूत्रों की मानें तो पुलिस पेंडेंसी कम करने के चक्कर में साल के आखिरी महीने में यथासंभव प्रकरण दर्ज ही नहीं करती है। इसका फायदा, अपराधी उठाते हैं। शातिर बदमाशों को यह पता होता है कि पुलिस सामान्य व्यक्ति की एफआईआर दर्ज नहीं करती और वे खुलकर अपराध करने से नहीं चूकते। पुलिस द्वारा संगीन वारदातों को भी छुपाने का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ता है। लोग ऐसे बदमाशों के कृत्य से अनजान रहते हैं और शातिर अपराधी एक के बाद एक वारदातों को अंजाम देते रहते हैं।
 
मकोका में खास क्या
 
इसी साल अक्टूबर में महाराष्ट्र के कई शहरों में चेन स्नैचरों पर मकोका के तहत केस दर्ज किए गए हैं। इनमें नागपुर व पुणो अव्वल हैं। मकोका 1999 में अस्तित्व में आया था। इसे मुंबई जैसे महानगर में अंडरवल्र्ड व संगठित अपराधियों पर नकेल कसने के लिए बनाया गया था। किसी आरोपी पर मकोका लगने का मतलब है पक्की जेल। 
 
सामान्य कानून के तहत जमानत पाना आरोपी का हक होता है, जबकि जेल कभी-कभार ही होती है। मकोका में जेल जाना जरूरी है, अपवाद स्वरूप ही जमानत होती है। 
 
आम कानून में आरोपी को 15 दिन की हिरासत में भेजा जाता है जबकि मकोका में 30 दिन के लिए। वहीं, पुलिस को भी चार्जशीट दायर करने के लिए 90 के बजाय 180 दिन मिलते हैं। आरोपी का इकबालिया बयान भी अदालत में सबूत के तौर पर इस्तेमाल हो सकता है।
 
 
जिनकी चेन टूटी, उनका गुस्सा..
 
ऐसे बदमाशों को फांसी दो
 
लक्ष्मी नगर-ए के पार्क के निकट रहने वाली उगम कंवर जैन का कहना है कि बदमाशों में पुलिस का भय भी नहीं। इन्हें तो फांसी पर लटका देना चाहिए। ऐसी वारदातें होती रहेंगी तो महिलाएं गहना पहनना ही छोड़ देंगी?
 
कानून के जानकार कहते हैं..
 
कड़े कानून की जरूरत है
 
रिटायर्ड डीजीपी पीके तिवाड़ी का कहना है कि ऑर्गेनाइज्ड क्राइम और चेन स्नैचिंग की बढ़ती वारदातों के मद्देनजर सख्त कानून की जरूरत हैं। महाराष्ट्र में मकोका लगाया गया है। उसी से वहां पर ऑर्गेनाइज्ड क्राइम पर अंकुश लगा है। राजस्थान में भी कठोर कानून बनना चाहिए।
 
राजस्थान में भी बने सख्त कानून 
 
राजस्थान हाईकोर्ट के अधिवक्ता सचिन आचार्य का कहना है कि अपराध के दमन के लिए राज्य की इच्छाशक्तिऔर कठोर कानून जरूरी हैं। चेन स्नैचिंग में पुलिस ज्यादातर आईपीसी की धारा 392 की बजाय 379 के तहत मामला दर्ज करती है, ऐसे में अभियोजन न्यायालय में फेल हो जाते हैं। 
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