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भंडार ने 400 रुपए अधिक देकर खरीदे नकली इंजेक्शन
bhaskar news | Jun 27, 2012, 05:57AM IST
दोनों जगह आपूर्ति किए गए इंजेक्शन के बैच नंबर क्रमश: 44331 व 44332 थे। लाइफलाइन स्टोर में इन इंजेक्शन की खरीद जेनेरिक मानते हुए की गई। वहीं भंडार ने इन्हें ब्रांडेड मान कर खरीद की। भंडार प्रबंधन का कहना है कि उन्होंने टेंडर में आई दरों के आधार पर ही खरीद की थी।
बाजार में मेरोपेनम की दरें गिरने की उन्हें जानकारी नहीं थी। दूसरी ओर मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना शुरू होने के बाद लाइफलाइन स्टोर व अस्पतालों के लिए कॉलेज स्तर पर हुई खरीद में यह दर सामने आ चुकी थी। इस प्रक्रिया में आपूर्तिकर्ता बनने के लिए भंडार ने भी प्रयास किए थे। इसके बावजूद महंगी खरीद पर कोई ध्यान नहीं दिया। इसका नुकसान मरीजों को उठाना पड़ा।
सेंट्रल स्टोर से जारी हुए 136 इंजेक्शन
भंडार के काउंटर पर दवाइयों की आपूर्ति सेंट्रल स्टोर के माध्यम से होती है। साथ ही कई फार्मासिस्ट भंडार की निर्धारित दर से अपने स्तर पर खरीद कर बिल भंडार को भेजते हैं। नकली इंजेक्शन के खुलासे के बाद भंडार प्रबंधन के रिकॉर्ड के मुताबिक सेंट्रल स्टोर से मेरोसिडी के 82 व मेरोसुल के 54 इंजेक्शन जारी किए गए, जबकि एमडीएम अस्पताल के काउंटर नं. दो के रिकॉर्ड में 119 इंजेक्शन की बिक्री सामने आई है। भंडार के पास इस काउंटर के अतिरिक्त अन्य काउंटर पर सीधी खरीद की जानकारी तक नहीं है।
बिना बिल बिकने की आशंका
जीवन रक्षक एंटीबायोटिक मेरोपेनम की खपत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जहां भंडार का दावा है कि उसके स्टोर ने सात से आठ माह में 136 इंजेक्शन जारी किए, जबकि एमडीएम अस्पताल के एक काउंटर ने दो से तीन माह में ही 119 इंजेक्शन बेच दिए। भंडार काउंटर के फार्मासिस्टों का इतिहास देखें तो बिना इंद्राज के दवाइयां बेचने व स्टॉक में हेरफेर कर गबन के कई मामले सामने आ चुके हैं। सूत्रों की मानें तो मिलीभगत के चलते फार्मासिस्टों ने बिना बिल सस्ते भावों में खरीद कर मोटी चांदी काटी है, जिसका रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।
सीआईडी ने खरीदा तीन सौ रुपए में
सीआईडी (इंटेलीजेंस) को मेरोपेनम के नकली इंजेक्शन बिकने की जानकारी मिली थी। सीआईडी के अधिकारियों ने बोगस ग्राहक बनकर एमडीएम अस्पताल परिसर स्थित वर्षा मेडिकल से महज 300 रुपए में इंजेक्शन खरीदा था। इसके बाद पड़ताल के दौरान जिस कंपनी को इंजेक्शन का निर्माता बताया गया उसने इसके निर्माण से ही इनकार कर दिया। इसके बाद सीआईडी ने नाकोड़ा मेडिकोज पर छापा मारकर नकली इंजेक्शन का खुलासा किया था। इस मामले में पांच लोग अभी जेल मे हैं।
हमसे चूक तो हुई
'हमने टेंडर की दरों के आधार पर ही इंजेक्शन की खरीद की थी। नाकोड़ा मेडिकोज बरसों से दवाइयां सप्लाई कर रही थी। दरें कम होने की जानकारी नहीं रखना सुपरविजन की चूक है। सेंट्रल स्टोर के अतिरिक्त अन्य काउंटर पर सीधी आपूर्ति कितनी हुई है, इसका पता लगाया जाएगा। भंडार में सुपरविजन की व्यवस्था को मजबूत करेंगे। साथ ही अन्य दवाइयों की आपूर्ति व खरीद की दरों की समीक्षा की जाएगी।'
भवानी सिंह कविया, महाप्रबंधक
जोधपुर होलसेल उपभोक्ता भंडार






