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वे 45 मिनट: लगातार हो रही थी फायरिंग और हम गांधी जी की मूर्ती की ओट में लेटे रहे!

Bhaskar News | Feb 10, 2013, 05:12AM IST
वे 45 मिनट: लगातार  हो रही थी फायरिंग और हम गांधी जी की मूर्ती की ओट में लेटे रहे!
जोधपुर. स्वदेशी मेले में प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को निमंत्रित करने के लिए हम लोग संसद गए थे। उनसे मिलने का समय भैरोंसिंह शेखावत ने तय कराया था। ठीक 11 बजे हम संसद में थे तभी मैसेज आया कि प्रधानमंत्री आज नहीं आएंगे, तीन बजे घर पर मुलाकात होगी। 
 
जसवंत सिंह लाइब्रेरी में जाकर आने का कह कर निकल गए और हम पोर्च में इंतजार करने लगे। तभी पटाखों जैसी आवाज आई तो किसी ने कहा कि कोई रिटायर हुआ होगा, इसलिए पटाखे छोड़े जा रहे हैं। दो मिनट बाद ही एक आतंकी हमारे नजदीक आया और फायरिंग करने लगा तो सिक्यूरिटी गार्ड ने हमें धक्का दे दिया। 
 
हम लोग वहीं लेट गए और घुटनों के बल चलते हुए गांधी जी की मूर्ति की ओट में लेटे रहे। तब तक गोरखा रेजिमेंट ने पोजिशन ले ली, मगर वे जवाबी फायरिंग नहीं कर रहे थे। उन्होंने समझाया कि सिर ऊपर नहीं करेंगे और बातचीत बंद रखेंगे, नहीं तो आतंकी इधर फायरिंग करेंगे। 
 
आतंकी लगातार गेट की तरफ फायरिंग किए जा रहे थे। मेरे साथी महेंद्र पित्ती और लक्ष्मीनारायण व्यास ने तो गले में पहना हनुमानजी का लॉकेट निकाला और ईश्वर से प्रार्थना करने लगे। उस वक्त तो लगा कि आज नहीं बचेंगे। 
 
घर भी फोन करते तो कैसे, मोबाइल नेटवर्क भी जाम हो चुका था। थोड़ी देर बाद दस-बारह कमांडो आए और आतंकियों पर गोलियां चलाने लगे। करीब 45 मिनट तक चली मुठभेड़ का पूरा दृश्य हमने देखा, वह जिंदगी की सबसे मुश्किल घड़ी थी। 
 
जब कमांडो ने आतंकियों को ढेर कर दिया तो हम लोग वहां से दौड़ते हुए पोर्च में जा पहुंचे। पोर्च में जॉर्ज फर्नाडिस और प्रमोद महाजन हमारे पास आए और कुशलक्षेम पूछा। फिर जसवंत सिंह बाहर निकले, उन्होंने गाड़ी मंगवा कर हमें अपने घर भेजा। उस रात हम सभी की आंखों से नींद गायब थी। 
 
जब जोधपुर पहुंचे तब सामान्य नहीं पाए। आज उस आतंकी हमले के साजिशकर्ता अफजल गुरु को फांसी देने की खबर सुनी तो वह दृश्य फिर आंखों के सामने आ गया। सरकार का यह निर्णय हालांकि देरी से लिया हुआ है, मगर यह आतंकियों को सख्त जवाब है।
 
- मेघराज लोहिया,
राजसीको के पूर्व अध्यक्ष, आतंकी हमले के चश्मदीद। 
 
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