कथा के अनुसार एक समय दक्ष प्रजापति ने एक यज्ञ का आयोजन किया और उसमे अपने दामाद अर्थात भगवान शंकर को इस यज्ञ में आमंत्रित नहीं किया,जब माता सती को इस बात की खबर लगी तो वे आगबबुला हो गईं और दक्ष प्रजापति द्वारा किये जा रहे उस यज्ञ की वेदी में कूदकर आत्मदाह कर लिया।